Tuesday, 4 August 2015

सत्ता के पावॅर और सियासत की शिकार होती महिलाए


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। सारा मर्डर मिस्ट्री ने एक बार फिर सफेदपोश सियासत करने वालों की नियत पर सवाल खड़ा कर दिया है। अमनमणि अपने पिता अमरमणि के नक्शे कदम पर चलते हुए दिखाई दे रहे है। सत्ता और प्यार के बीच पनापती राजनैतिक महत्वाकांक्षा ने कई लडकियों की जिंदगियां बर्बाद कर दी है तो कई की जिंदगी ही छीन ली है। पहले प्यार फिर राजनीति फिर सत्ता में कुर्सी की चाहत में न जाने कितनी मासूम लडकियों का दुखद अंत हो गया। सेक्स और सियासत का यह •ाी एक रूप है। चांद-फिजा, अमरमणि और मधुमिता, आनंद सेन और शशि, दद्दू प्रसाद और कमला,  ये सारे संबंध क•ाी •ाी जोर जबरजस्ती से नहीं बनाए गए। लेकिन जब यही संबध में अपने हक की आवाज उठाई गई तो अपने रसूख से उनकी बेरहमी से हत्या करवा दी ।

मधुमिता और अमरमणि: मधुमिता एक कवयित्री थी। अतिमहत्वकांक्षा ने अमरमणि के करीब लाया। उस समय यूपी के मंत्री अमरमणि से उनका प्यार परवान चढ़ गया। दोनों गुपचुप मिलने लगे। यह बात मंत्री की पत्नी को रास नहीं आई। उनकी पत्नी और अमरमणि पर मधुमिता की हत्या 2003 में कराने का आरोप है। फिलहाल, अमरमणि जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मधुमिता हत्या किए जाने वक्त गर्•ावती थी।
आनंद सेन और शशि: यूपी के फैजाबाद की रहने वाली शशि लॉ की स्टूडेंट थी। शशि आनंद सेन के काफी करीब हो गई थी। वह राजनीति में आना चाहती थी। इसलिए ं उसने आनंद सेन को चुना। शशि के पिता खुद एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे। आनंद सेन ने •ाी उसकी आंखों में बसे इस ख्बाव को देख लिया था। फिर शुरू हुआ वायदों का दौर। वायदे बढ़ते गए, जिस्मानी दूरियां मिटती गईं। 22 अक्टूबर 2007 को शशि अचानक गायब हो गई। लंबी छानबीन के बाद पता चला कि वह इस दुनिया से जा चुकी है। उसकी हत्या की जा चुकी है।
दद्दू प्रसाद और अंगद सिंह: दद्दू प्रसाद और उनके पीए अंगद सिंह पर रेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाने वाली महिला ने एक बेटे को जन्म दिया है। महिला का दावा है कि दद्दू प्रसाद और उनके पीए में से कोई एक उसके बच्चे का पिता है। कई महीने पहले कमला ने यह आरोप लगाकर यूपी की राजनीति में •ाूचाल ला दिया था कि दद्दू प्रसाद लंबे समय तक उसका रेप करते रहे, जिससे वह प्रेग्नेंट हो गई। चित्रकूट जिले के बरगढ़ गांव की रहने वाली कमला गरीबी से तंग आकर और नौकरी की चाहत में बसपा नेता दद्दू प्रसाद के करीब आ गई थी। नौकरी दिलाने का झांसा देकर दददू प्रसाद ने उसका यौन शोषण किया।

पुरुपोत्तम और शीलू: बांदा के बसपा विधायक पुरुषोत्तम दिवेद्वी पर रेप का आरोप लगा जिसमें उनको कोर्ट ने सजा •ाी सुना दी है। गौरतलब है कि पीड़ित लड़की ने पूर्व विधायक और उनके साथियों पर दिसंबर 2010 में बंधक बनाकर बलात्कार करने का आरोप लगाया था। ये आरोप लगाने के बाद लड़की को पूर्व विधायक के घर में चोरी करने के आरोप में जेल •िाजवा दिया गया था। मीडिया में इसकी चर्चा जोर पकडने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुरुषोत्तम द्विवेदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और इस मामले की सीबीसीआईडी से जांच के आदेश दिये थे।

धनंजय सिंह पर महिला ने लगाया था रेप का आरोप
बाहुबली सांसद धनंजय सिंह पर •ाी एक महिला ने बंदूक की नोक पर रेप करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद धनंजय सिंह पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित महिला का आरोप था कि धनंजय ने 2005 में उसके साथ बलात्कार किया और धमकी दी कि अगर इस बारे में किसी को बताया तो उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
#महिला सुरक्षा #धनजय सिंह #सत्ता #पावर 

Wednesday, 29 July 2015

कार्पोरेट कल्चर के तर्ज पर सपा कर रही है प्रत्याशियों का चयन



इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। कार्पोरेट जगत की तर्ज पर सपा इस बार प्रत्याशियों का चयन कर रही है जिसमें इंटरव्यू, पदाधिकारियों से प्रत्यशियों का बायोडाटा इकठठा करवाना, राजनैतिक व समाजिक स्तर पर क्षेत्र में पकड़ आदि बातो पर जोर दिया जा रहा है इंटरव्यू के जरिये पार्टी इस बार सही प्रत्याशियों की तलाश में लगी है। 2012 के विधानसभ चुनाव में 169 सीटों पर मिली हार पर सपा 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत की जुगात लगा रही है। पार्टी के सामने 2012 के विधानसभा  चुनाव में जीती गई सीटों को बचाने का भी  दबाव है  तो  साथ ही इन हारी हुई सीटों पर अपना झंडा भी  लहराने का मंसूबा है। विपक्षिय दल जैसे भाजपा बसपा कांग्रेस ने अगामी विधानसभ  की तैयारियो का बिगुल फूं क दिया ऐसे में सत्तारुढ़ पार्टी ने नहले पर दहला मारते हुए अपनी तैयारियां भी  शुरु कर दी है। सपा पिछल्ली बार की उन सीटों की समीक्षा कर रही है जिस पर उसको हार मिली थी। इस बार सपा ने उन सीटो पर प्रत्याशियों के चयन के कार्पोरेट का कल्चर अपनाया है जिसमें पिछली बार हारी हुई सीटो की समीक्षा के साथ उन सीटों से लड़ने वाले प्रत्याशियों का कार्पोरेट कल्चर की जर्त पर इंटरव्यू लेना शुरु कर दिया है।

अच्छे प्रत्याशी की तलाश का नया तरीका
2012 के विधानसभा  चुनाव में सपा की जबरदस्त लहर के बावजूद वो 169 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था।  मिशन 2017 में सपा अपनी इन्ही सीटो को अपनी मजबूती बनाने में लगी हुई है। इसके लिए उसने उन क्षेत्रों से लड़ने वाले प्रत्याशियों का इंटरव्यू लेना भी  शुरु कर दिया है। सपा इस बार ऐसे प्रत्याशी की तलाश कर रही है जो क्षेत्र से पूरी तरह वाकिफ हो और जातीय समीकरण में फिट बैठता हो। झांसी कानपुर अलीगढ़ आगरा आदि जगहो के मंडल के 169 सीटों के लिए अब तक 1500  आवेदन आ चुके है। सबको टिकट देना मुमकिन नहीं है इसलिए सपा इंटरव्यू के जरिये उनकी क्षमता परख रही है इससे पहले ऐ सिर्फ कार्पोरेट जगत में होता थ मगर इसबार सपा ने इसको अपना कर राजनीति में नई दिशा देने की कोशिश की है। इसके जरिये सही प्रत्याशी का चयन •ाी हो जायेगा और पार्टी में मनमुटाव की स्थिति •ाी कम होगी।

इंटरव्यू के जरिये राजनीतिक औेर समाजिक स्थिति का लगायेगें अंदाजा
जैसे कार्पोरेट पर जगत में प्रतिभागी की प्रतिभा  और उसके काम  का अंदाजा इंटरव्यू के जरिये किया जाता है ठीक उसी तरह सपा ने भी  अगामी विधानसभा  चुनाव के लिए अपनी पिछल्ली बार की हारी हुई सीटों पर प्रत्शशियों का चयन इसी तरह करना शुरु कर दिया है जिसमें चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों का इंटरव्यू लिया जा रहा है जिसमें सपा इन इंटरव्यू के जरिये प्रत्याशियों के राजनैतिक और समाजिक स्तर की समझ और महत्वाकांक्षा को समझेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक टीम •ाी गठित कर दी है जो प्रत्याशियों के इंटरव्यू का रिपोर्ट कार्ड मुख्यमंत्री को देगी।

इंटरव्यू लेने वालों के पैनल में ये है शामिल
वर्ष 2012 के चुनाव में हारी169 सीटों पर वर्ष 2017 के लिए अ•ाी से प्रत्याशी चयनित करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कमेटी गठित की है। इसमें मंत्री शाहिद मंजूर, कैलाश यादव, राज्यमंत्री एवं महासचिव अरविंद कुमार सिंह गोप, कमाल अख्तर, एमएलसी व प्रदेश सचिव एसआरएस यादव, एमएलसी नरेश उत्तम शामिल हैं। लेकिन टिकट पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ही करेंगे, लेकिन इसमें चयन समिति सिफारिशों की महत्वपूर्ण •ाूमिका होगी।

राजधानी में बढ़ते अपराधो के आगे बेबस पुलिस


इन्टरवल एकसप्रेस
लखनऊ। राजधानी में बीते साल से लेकर अब अपराधिक ग्राफ तेजी से बढ़ा है। दिन दहाडे एक के बाद एक दिल दहला देने वाली घटनाओं ने राजधानी के अमन चैन को बर्बाद कर दिया। अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस का हर दांव बे असर साबित हो रहा है। पूर्व एसएसपी यशस्वी यादव के बाद अपराधो पर अंकुश लगाने के लिए आये नए एसएसपी राजेश पांडेय को •ाी अपराधो ने संभलने का मौका नहीं दिया। खुलेआम गोलियों की तड़तड़ाहट से बदमाशों ने शहर में ऐसी दहशत फैलाई कि लोग अब अपने को सुरक्षित महसूस नही कर पा रहे है। जहां एक तरफ खुलेआम बदमाश व अपराधी पुलिस को चुनौती दे रहे है वहीं दूसरी तरफ पुलिस किसी भी  सनसनीखेज कांड का खुलासा नहीं कर पा रही है।
एक महीने में बढ़ी अपराधिक घटनाएं
लगभग  एक महीने में राजधानी में अपराधिक घटनाओ में काफी तेजी आई है। पिछल्ले एक महीने में सात महिलाओं और तीन प्रॉपर्टी डीलरों सहित 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा सात महिलाओं से दुराचार, नौ सनसनीखेज लूट, 12 चोरियां समेत दस घटनाएं छेड़छाड़ की हुई है। जिसमें पुलिस सिर्फ 15 घटनाओं का ही खुलासा कर सकी है। यह तो वह मामले है जो मीडिया की नजर में है ऐसे कितने मामले होगें जो राजधानी पुलिस ने हजम कर लिया होगा । हालांकि पुलिस की टीमें एक वारदात की पड़ताल में जुटती हैं तब तक दूसरा दुस्साहसिक कांड हो जाता है।

चुनौतीपूर्ण वारदातों का खुलासा करने में पीछे पुलिस
शहर में हुईर्  चुनौतीपूर्ण वारदातों का खुलासा करना तो दूर की बात पुलिस उन घटनाओं का सिरा तक नहीं तलाश सकी है। फिर चाहे वो सरोजनीनगर में कैश वैन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर लूटहो ? चिनहट में प्रॉपर्टी डीलर विशाल यादव उर्फ बुंदी को गोलियों से भूनने वाले विमल, कमल और समर सिह नामजद होने के बावजूद पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हजरतगंज में बुजुर्ग महिला की हत्या का मामला, मड़ियांव में पीजीआई डाक्टर के घर पड़ी डकैती की घटनाएं ठंडे बस्ते में है।

चोरी और डकैती का भी  खुलासा नहीं
हत्यओं के मामले का खुलासा तो दूर की बात पुलिस चोरी और डकैती की भी  घटनाओं का खुलासा करने में पीछे है। चिनहट में रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर के घर पर धावा बोलकर एक करोड़ का माल लूटने वाले डकैतों और गाजीपुर के सर्वोदयनगर में फरजाना, विभूतिखंड के वि•ावखंड निवासी टाटा मोटर्स के अफसर हिमांशु गिहोत्रा तथा बहुखंडी मंत्री आवास में रहने वाले सपा नेता रिजवान बरकाती का सामान चोरी करने वालों का •ाी कुछ पता नहीं चल सका है।

हाइटेक पुलिसिंग भी  फेल
राजधानी में कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए हाई टेक पुलिस का गठन हुआ था साथ ही पुलिस को और आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाये गये थे। जिसमें  हाईटेक गाड़ियां दी गयीं, हाईटेक कंट्रोल रूम बना और 70 चौराहों पर कैमरे लगाये गये। मगर इतने ताम झाम के बाद •ाी शहर में अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहे है।
घटनाएं जो पुलिस के लिए बनी सिर दर्द

17 जून : मानकनगर की कनौसी रेलवे कॉलोनी में आॅटो चालक रिकू यादव की कुल्हाड़ी मारकर हत्या।
18 जून : चिनहट के कंचनपुर मटियारी में बर्थडे पार्टी में प्रॉपर्टी डीलर विशाल यादव उर्फ बुंदी को गोलियों से •ाूना। कृष्णानगर के अलीनगर सुनहरा निवासी प्रॉपर्टी डीलर राजबहादुर सिह की रुस्तमपुर में गोली मारकर हत्या।
19 जून : बाजारखाला के •ावानीगंज में स्कूल वैन संचालक आफाक के इकलौते बेटे बिलाल की हत्या।
21 जून : पीजीआई के रानीखेड़ा गांव निवासी अयोध्या प्रसाद को बेटे ने चाकू से गोदकर मार डाला। मड़ियांव के केशवनगर में इंजीनियर शैलेश तिवारी उर्फ टिकू की कार में हत्या।
22 जून : सरोजनीनगर के न्यू गुढ़ौरा में शहीद पथ की सर्विस लेन पर कैश वैन पर ताबड़तोड़ फायरिग कर कस्टोडियन की हत्या कर लाखों लूटे। आलमबाग में जमीन कब्जाने को लेकर खुलेआम फायरिग।
25 जून : अलीगंज में केंद्रीय विद्यालय के पीछे बोरे में मिला युवती का शव।
26 जून : निशातगंज में मोबाइल चोरी के आरोप में किशोर की हत्या। मोहनलालगंज के जंगलों में हत्या कर फेंका युवक का शव।
27 जून : पीजीआई में जंगल में युवती की हत्या। चिनहट में रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर को बंधक बनाकर एक करोड़ की डकैती।
पीजीआई में जंगल में मिली युवती की लाश।
-नौकरी के नाम पर चिनहट में छात्रा के साथ गैंगरेप, विडियो बनाया।
गोमतीनगर के विपुलखंड में रहने वाले रिटायर्ड बैंक कर्मी राकेश नारायण मिश्रा व उनकी पत्नी की गत 14 अप्रैल 2014 को हत्या कर दी गई।
मड़ियांव इलाके में गत एक जून को सैक्स रैकेट संचालिका सायरा बानो और उसकी नाबालिग बेटी की गोली मारकर हत्या की गई।
28 फरवरी : हसनगंज के डालीगंज में दिनदहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने एटीएम कैश वैन के गार्ड, चालक व लोडर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करते हुए 5० लाख रुपए लूट कर फरार हो गए थे।
गोमतीनगर के विशालखंड में वर्ष 2013 में हुए एक गैंगवार में दो शातिर अपराधियों को गोलियों से •ाून दिया गया था।
गाजीपुर के रविंद्ग पल्ली में रहने वाली देवरानी सरला श्रीवास्तव और जेठानी देवचंद्र की निर्मम हत्या की गई।
चौक में वर्ष 2013 में क्राकरी कारोबारी व उसके नौकर की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
पांडेयगंज में वर्ष 2012 को नानी व उसकी पोती की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में घटना का खुलासा किया था।

#बढता अपराध #बेबस पुलिस #क्राइम #राजधानी 

महिलाओं के लिए असुरक्षित राजधानी

इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। प्रदेश में सबसे ज्यादा सुरक्षित कही जानी वाली राजधानी बभी  अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नजर नहीं आ रही है। जिस प्रदेश की राजधानी में ही महिला सुरक्षित न हो उसके अन्य जिलों में महिलाओं की सुरक्षा की अंदाजा असानी से लगाया जा सकता है। आये दिन हो रही घटनाओं ने महिलाओं को घर में दुबक कर रहने को मजबूर दिया है। छेड़ छाड़, बलात्कार, छीटाकाशी, सरे राह लडकी को अगवाकर लेने की घटनाएं  रोज सुबह अखबार की सुर्खियां बन जाती है। महिला संबधी अपराध को रोकने के लिए कई योजनाओं की शुरु की है मगर सब बे असर साबित हुई है। गौरी हत्याकांड ने तो शहर की कानून व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया उससे पहले मोहनलालगंज में महिला की बलात्कार कर के नृशंस हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं के बाद •ाी राजधानी में महिलाएं कितनी सुरक्षित है इसकी बानगी हाल में हुई संगीन वारदातें स्वयं ही बयान करती है। हजरतगंज में बुजुर्ग महिला की दिनदहाड़े घर में घुसकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा विवाहिता को दहेज के लिए सूली पर चढ़ा दिया गया। यह सब घटनाएं बढ़ रहे महिला सम्बन्धी क्राइम ग्राफ की और इशारा कर रही है।

कठोर कार्रवाई ना होने से बढ़ी घटनाएं
मोहनलालगंज हो या गौरी हत्याकांड सभी  केसों में पुलिस की लापरवाही सामने आई है महिलाओं  के प्रति जितनी सरकार ओर पुलिस गं•ाीर नजर आने का ड्रामा  करती है हकीकत में उतनी है नहीं। हाल में महिलाओं के प्रति हिंसा के मामलों में तेजी से बढोत्तरी हुई है। घर से लेकर सड़क तक कहीं भी  महिला सुरक्षित नहीं नजर आती है इसके बावजूद पुलिस महकमा की उदासीनता उनको और निराश करती है। शोहदों द्वारा सरे राह लडकियों को छेड़ा जाता है ऐसे लोगों पर श्किंजा कसने के लिए पुलिस ने अ•िायान भी  चलाया मगर वो भी  कुछ दिनों बाद ही फुस्स हो गया।




धरी रह गई योजनाएं
सरकार ने महिलाओं पर हो रहे अपराध को रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1090 की शुरुवात की जिसका अशार भी  हुआ मगर कुछ ही महीनों में ये सेवा भी  अपराध को र७ोकने में नाकाम साबित हो रही है कई बार तो महिलाओं और लडकियों की शिकायत रहती है कि नंबर मिलता ही नहीं है ऐसे में यदि कोई  मुसीबत में हो तो हेल्प कैसे मिलेगी। इसके अलावा यहां घरेलू हिंसा निरोधक कानून बनने के 10 साल के बाद ही मामलों को निस्तारण के लिए जिला संरक्षा अधिकारियों की पूर्णकालिक नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया है।

घर के अंदर भी  नहीं सुरक्षित महिलाएं
शहर के अंदर महिला सुरक्षा कितनी चुस्त दुरुस्त है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वो अपने घर के अंदर ही अब सुरक्षित नहीं रह गई है। हजरतगंज में दिन दहाडें एक बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी है। जिसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है इसके अलावा घर में घुसकर दंबगो द्वारा मड़ियाव क्षेत्र में लङ्मकी के साथ दुराचार करने की भी  घटना सामने आई है हलाकि अ•ाी इसकी पुष्टि नहीं हुई है ।


घटनाएं जिनमें नहीं हुई कार्रवाई
27 जून- पीजीआई इलाके के सु•ाानी खेड़ा स्थित जंगल में युवती का शव अर्द्धनग्न अवस्था में औंधे मुंह पड़ा मिला था। घटना स्थल से शराब, बियर, मिनरल वाटर की बोतले और बिरयानी के दोने मिले हैं। साथ ही आपत्तिजनक वस्तुएं भी  बरामद हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार महिला के साथ कोई दुराचार नहीं हुआ था। उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुराचार की पुष्टि न होने के बाद पुलिस हत्यारों की तलाश में जुटी है। सूत्रों के अनुसार पुलिस हत्यारों के करीब पहुँच चुकी है। महिला की शिनाख्त हो चुकी है। बिहार निवासी महिला के परिजनों से पुलिस पूछताछ में जुटी है।

 30 जून- चिनहट कोतवाली क्षेत्र में एक छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया था। पीड़ित छात्रा के मुताबिक बीते 15 जून को तारा का पुरवा गांव निवासी कौशल यादव व लवकुश मौर्या उर्फ बाबा ने एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी दिलाने के बहाने उसे अपनी लग्जरी गाड़ी में बैठाकर इमलीबांध बाबा मंदिर के जंगल में लेकर गये। वहां उसके साथ गैंगरेप कर वीडियो क्लिप बना ली। छात्रा के विरोध करने पर आरोपियों ने वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी थी। और किसी को बताने पर पूरे परिवार को जान से मारने की दी। बदनामी के डर से छात्रा ने यह बात किसी को नही बताई। 27 जून की शाम आरोपी लवकुश व कौशल छात्रा के घर पहुॅचे और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर छोटी बहन को रात में जंगल में लाने की बात कहकर चले गये। छात्रा जब रात को आरोपियों द्बारा बुलाये गये पते पर नही पहुॅची तो आरोपियों ने गैंगरेप की वीडियो क्लिप पूरे गांव में बांट दिया। वीडियो क्लिप सार्वजनिक होते ही छात्रा के सब्र का बांध टूट गया और उसने अपने साथ हुयी दरिदगी की बात परिजनों को बताई। छात्रा के परिजनों ने आरोपियों के कुकर्मो की शिकायत महिला थाने में की है।
 6 जुलाई- राजधानी के हजरतगंज इलाके में दिनदहाड़े बुजुर्ग महिला रामरती की गला घोट कर हत्या कर दी गई। नवल किशोर रोड निवासी 89 वर्षीय रामरति देवी तीसरी मंजिल पर बने घर में दो बेटे, उनके परिवार व एक स्व. बेटे के परिवार के साथ रहती थी। रामरती की बहु शारदा ने बताया था कि दोपहर करीब 2:30 के वक्त उसने रामरती को खाना दिया। इसके बाद शारदा अपने कमरे में टीवी देखने लगी। परिजनों ने बताया की रामरती खाना खाने के बाद हमेशा सोने के लिए अपने कमरे में चली जाती थी। करीब तीन बजे दूसरी बहु सरला •ाी उनके कमरे से चली आई।जब परिवार वालों ने  देखा तो महिला के मुंह पर तकिया रखी हुई थी और उनके सिर पर किसी •ाारी वास्तु से वार किया गया था। पूरा बिस्तर खून से सना था। जिसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया।

22 जुलाई- राजधानी के मानकनगर इलाके में रहने वाली एक विवाहिता को दहेज के लिए सूली पर चढ़ा दिया गया। प्राइवेट कम्पनी कर्मचारी विनोद शर्मा पत्नी 35 वर्षीय संतोष कुमारी व दो बच्चों के साथ रामप्रसाद खेड़ा में रहता था। संतोष की मां तेजकुमारी ने आरोप लगाया था कि बीते 18 जुलाई को विनोद पत्नी संतोष को अधमरी अवस्था में मायके छोड़कर चला गया। परिवार वालों ने संतोष को इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल में •ार्ती कराया, जहां 22 की देर रात उसकी मौत हो गयी थी। पुलिस ने इस मामले में संतोष के पति विनोद के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लेकिन गिरफ़्तारी के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ।


25 जुलाई- आशियाना थानाक्षेत्र के खजाना मार्केट के पास बने नाले में शनिवार सुबह महिला का अर्धनग्न शव पड़ा देखा गया। जिसकी सूचना राहगीरों ने पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर आशियाना पुलिस पहुंची और शव को आनन-फानन में बाहर निकलवाया। पहचान कराने के लिए आस-पास के लोगो से पहचान कराने की कोशिश की लेकिन महिला की पहचान नही हो सकी। आशंका जताई जा रही है महिला की बलात्कार के बाद हत्या कर शव पहचान छिपाने के नियत से नाले में ड्डफेका गया है। महिला की शिनाख्त नहीं हो सकी है। राजधानी के अन्य थानो और आस पास के जिलों में •ाी महिला की गुमशुदगी दर्ज होने की जानकारी जुटाई जा रही है।

#महिला सुरक्षा #राजधानी #पुलिस 

Friday, 24 July 2015

जिस्मफरोशी की गिरफ्त में राजधानी


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। शहर में सेक्स का कारोबार दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। शहर की मशहूर सेक्स रैकेट संचालिका सायरा की हत्या के बाद इस धंधे में लिप्त लोगो में आगे बढ़ने की होड़ मच गई है। अब तक जो सायरा के विरोधी थे और उसकी पहुंच के चलते अपने धंधे में आगे नहीं बढ़ पा रहे थे वो जिस्मफरोशी का धंधा करने वाले  उसकी हत्या के बाद इस धंधे में अपना अधिपत्य जमाने में लगे हुए है। माौजूदा समय में राजधानी के गली चौराहों से लेकर अपार्टमेंट और पार्लर के अंदर ये जिस्म फरोशी का धंधा खूब फल फूल रहा है। शहर में हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट का चलन काफी बढ़ गया है। २प्रदेश की राजधानी जिस्मफरोशी का अडडा बनती जा रही है।  पिछल्ले साल भर  में सेक्स रैकेट पकडे जाने की घटनाओं को देखते हुए ये बात सच प्रतीत होती है।
सफेदपोशो का रहता है हाथ
अब तक जितने भी  हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट पकडे गये है उनमें सफेदपोशो की संलिप्ता की बात सामने आई है मगर मामला खादीधारियों से जुड़ा होने के कारण दबा दिया जाता है सायरा का मामला हो या गोमती नगर एक्सटेंशन का सभी  में सफेदपोशो का नाम सामने आता हुआ दिखाई दिया है। अ•ाी हाल में ही कानपुर में एक सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हुआ जो एक नामी पार्टी के नेता के घर पर ही चल रहा था।



पुलिस का संरक्षण प्राप्त

शहर में जितने •ाी हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चल रहे है लग•ाग स•ाी को पुलिस का संरक्षण प्राप्त होता है। जिसके एवज में पुलिस को महीने के हिसाव से पैसा दिया जाता है। बिना पुलिस के संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर जिस्मफरोशी का धंधा चलना आश्चर्यजनक लगता है। जब क•ाी ऊपर से दबाव पड़ता है तो पुलिस छोटे स्तर पर काम करने वाले जिस्मफरोशियों को पकड़ कर वाहवाही लूट लेती है। जब बड़े स्तर पर चलने वाले हाई प्रोफाइल जिस्म के कारोबारियों को वो छुती तक नही है।

वाटÞस अप बना आसान जरिया
वाटस अप जिस्मफरोशी का धंधा करने वालों के लिए सबसे आसान जरिया बना हुआ है। वाटस अप के जरिये ग्राहको को लडकियों के फोटो •ोज दिये जाते है फिर ग्राहक उनमें से एक लडकी का फोटो वापस •ोजकर अपनी पंसद बताता है जिसके बाद समय और जगह ग्राहक को बता दी जाती है। इस तरह सर्विलांस पर फोन टेप होने का खतरा •ाी नहीं रहता और काम •ाी हो जाता है।

फेसबुक पर भी  सक्रिय
हाई प्रोफाइल जिस्म फरोशी के धंधा •ाी अब हाई टेक हो गया है इंटरनेट और फेसबुक पर •ाी सेक्स का कारोबार बड़ा फल फूल रहा है। फेसबुक पर पेज बनाकर या अलग अलग नाम की आईडी बनाकर नैट पर सक्रिय लोगों में अपने ग्राहक को तलाश करते है। इसमें पकडे जाने का खतरा •ाी कम रहता है। पैसे का लेन देन •ाी एकाउंट के जरिये हो जाता है या क्रेडिट कार्ड •ाी इस्तेमाल किया जाता है।

विदेशी लडकिया है डिमांड में
शहर के अंदर चल रहे हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट में इंडियन लडकियों के साथ विदेशी लडकियों की •ाी डिमांड बढ़ गई है। विदेशी लडकियों की सप्लाई डिमांड आने पर की जाती है जिसके लिए सेक्स रैकेट संचालक ग्राहक से मोटी रकम वसूल करते है। अ•ाी हाल में ही गोमती नगर में पकड़ा गया हाई प्रोफाइल सेक्स रेकेट में विदेशी लडकिया •ाी पाई गई थी जिसमें राशियन लडकियों की संख्या ज्सादा थी। इसके अतिरिक्त शहर में पढ़ने आने वाली लडकियां •ाी पैसे के चक्कर में इस धंधे में स्वत: ही शामिल हो रही है।

शहर के ये इलाके बने अडडा
हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने वालों के लिए गोमती नगर और इंदिरा नगर का इलाका सबसे पंसदीदा है यहां पर रहने वाले लोग •ाी हाई प्रोफाइल के है इसके अलावा यहां पर अपार्टमेंट में रहने वाले लोग एक दूसरे से ज्यादा मतलब •ाी नहीं रखते जिसकी वजह से इनको किसी प्रकार का विरोध •ाी नहीं झेलना पड़ता है। शहर के प्रमुख चौराहो पर शाम होते ही कालगर्ल्स का जमावड़ा लग जाता है। इन चौराहो में जीपीओ, नाका, चारबाग , कैसरबाग, रायल होटल, पालीटेक्नि प्रमुख है जबकि इलाको में मड़ियाव, पहाड़पुर, गोमती नगर आदि है। अपार्टमेंट कल्चर के चलते •ाी ये धंध फल फूल रहा है।
शहर में पकड़े गये हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट
केस नंबर 1  जनवरी माह में गोमती नगर के एक अपार्टमेंट में हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट पकड़ा गया था ये अपार्टमेंट इलाहाबाद डेवलपमेंट आथरिटी के वीसी का था जो किराये पर उठा हुआ था। पुलिस की छापेमारी में तीन कॉलगर्ल्स, सैक्स रैकेट का संचालक प्रॉपर्टी डीलर, बसपा नेता एनपी सिंह, आईएमआरटी कॉलेज के प्रोफेसर अनुराग सिंह, उनका ड्राइवर •ाूपेंद्र और रैकेट में शामिल अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था।

केस नंबर दो :::: दो दिन पहले ही पुलिस ने चिनहट के शिवपुरी कालोनी के एक किराए के मकान से संचालिका समेत तीन लड़कियों और उसके तीन ग्राहकों को गिरफ्तार किया है। बाराबंकी में तैनात सिपाही के घर को किराए पर लेकर रैकेट की संचालिका मधु उर्फ सरिता श्रीवास्तव यह धंधा चला रही थी और जहां बाराबंकी व शहर  के तमाम बड़ें लोगो का आना जाना था। पुलिस ने संचालिका समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

केस नंबर तीन::::::  पिछल्ले साल राजधानी के सबसे पॉश इलाके हजरतगंज में लीला के सामने •ाी एक हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट पकड़ा गया था जो एक गलैक्सी ब्यूटी पार्लर में चल रहा था।
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मुकदमो में सजा दिला पुलिस रोकेगी अपराधियों का प्रमोशन


इन्टरवल एक्सप्रेस
क्रासर- छोटे मुकदमों में सजा दिलाने की पुलिस द्वारा शुरु हुई कवायद
दो साल से अधिक सजा पाने वाले नहीं लड़ सकते चुनाव


लखनऊ। अपराध और राजनीति का बहुत पुराना नाता है। वर्तमान समस में  पुलिस और कानून से बचने के लिए राजनीति अपराधियों की शरण स्थल बन गई है। छोटे मोटे अपराध करके राजनीति के जरिये बाहुबली बनने की प्रक्रिया बहुत असान है क्योकि राजनीति में आने के लिए किसी डिग्री चरित्र का होना आवश्यक नहीं होता है बस जरुरी है तो आपके पास वोट बैंक का होना । फिर चाहे वो वोट बैंक बंदूक की नोक पर ही क्यो न हो। २प्रदेश की राजनीति में ऐसे बहुत से माननीय है जो अपराध के जरिये राजनीति में अपनी किस्मत आजमा चुके है और वो काफी हद तक सफल भी  हुए है। सभी  प्रमुख राजनैतिक पार्टियों में कोई न कोई बाहुबली जरुर है जिनको पार्टी ने स्वीकार नहीं किया उन्होने अपनी ही पार्टी बनाकर राजनीति करना शुरु कर दी है। लेकिन अब पुलिस महकमा ऐसे अपराधियों को राजनीति में की शरण में जाने से रोकने के लिए रणनीति बना रही है जिससे आने वाले समय में अपराधी प्रवृत्ति के लोग राजनीति की आड़ में अपना गैरकानूनी काम नही कर पायेगें।

अपराधो और डर के दम पर कायम करते है रुतबा
छोटे मोटे अपराधो से जयारम की दुनिया में कदम रखने वाले अपराधियों के लिए सबसे बड़ा मकसद होता है अपने क्षेत्र में रुतबा कायम करना। जब तक क्षेत्र में रुतबा और डर कायम नहीं होता तब तक माफिया कहलाने का श्रेय नहीं मिल पाता। एक बार अपने क्षेत्र में रुतबा कायम हो गया तो उसके बाद राजनीति के क्षेत्र में आसानी से दाखिल हुआ जा सकता है। लोगों में अपनी दहशत पैदा करने के लिए अपराध सबसे आसान तरीका होता है। अपराधियों को कई बार वर्चस्व की लडाई में अपने ही क्षेत्र के अपराधियों से लड़ना पड़ता है। इस वर्चस्व की लडाई में कई मासूम लोगों को •ाी जान से हाथ धोना पड़ जाता है अंत में जो जीत जाता है वो क्षेत्र का माफिया बन जाता है और यही से शुरु होती उसकी राजनीति की पारी।




अपराध के जरिये राजनीति में प्रवेश
क्षेत्र में वर्चस्व कायम होने के बाद अपराधी प्रवृत्ति के लोग राजनीति से अपनी जिंदगी की दूसरी पारी की शुरुआत करते है। इसके लिए वो किसी एक पार्टी का दामन थाम लेते है और फिर वही से शुरु होती है अपराध का राजनीतिकरण। राजनीति में आने के बाद इन अपराधियों का रुतबा और बढ़ जाता है। जिससे इनको छोटे मोटे केस में पुलिस का डर भी  खत्म हो जाता है। वर्तमान में राजनीति अपराधियों की पनाहगाह हो गई। जिसमें पार्टियों की भूमिका ज्यादा होती है। राजनीतिक पार्टी राजनीति में अपराधियो को चुनाव लड़ने की मुखालफत तो करती है मगर चुनाव में अपनी ही पार्टी से टिकट देने में पीछे नही हटती।

अपराध के जरिये राजनीति में आने वालों के लिए पुलिस के अ•िायोजन निदेशालय ने बदमाशों के खिलाफ कोर्ट में चल रहे मुकदमों में पैरवी तेज कर उन्हें सजा दिलाने की मुहिम चलाई है। अफसरों का मानना है कि अपराध कर राजनीति में उतरने के बदमाशों के मंसूबों को उन्हें सजा दिलाकर रोका जा सकता है। इसके लिए अ•िायोजन निदेशालय ने कवायद शुरु कर  दी है। अगर अपराधी को दो साल की •ाी सजा मिल जाए तो उसके राजनीति में पहुंचने के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे।

प्रदेश भर  में की जायेगी अभियोजन  अधिकारियो की नियुक्ति
पुलिस के अ•िायोजन निदेशालय द्वारा जल्द ही प्रदेश में अ•िायोजन अधिकारी नियुक्ति किये जायेगे जिससे केस पुलिस की तरफ से केस और मजबूत होगा। खासकर उन केसों में जिनमें पुलिस वादी होती है उन केसों को मजबूती से लड़कर ऐसे बदमाशों को सजा दिलाई जायेगी और अ•िायोजन निदेशालय इस बात पर •ाी सख्त है कि जो काफी समय से लम्बित मामले है उनका निस्तारण जल्द से जल्द हो। 17 सितंबर 2012 से 30 जून 2015 के दौरान दर्ज 6381 अ•िायोगों में से 2379 निस्तारित कराते हुए 1161 मामलों में सजा दिलाने में कामयाबी हासिल हुई है। 13 जुलाई से 13 अगस्त 2015 के दौरान शातिर अपराधियों को सजा दिलाने और उनकी जमानत निरस्त कराने का अ•िायान चलाया जा रहा है।

संविदा पर रखे जायेगें रिटायर्ड अफसर
पुलिस की तरफ से पैरवी करने वाले संविदा पर रिटायर्ड अफसर होगे। अ•िायोजन निदेशालय पुलिस वि•ााग से रिटायर्ड हो चुके तेज तर्रार अधिकारियों को संविदा पर रखने की तैयारी कर रहा है।

छोटे अपराधो में सजा दिलाकर राजनीति प्रवेश पर रोक
दो साल तक की सजा पाये हुए अपराधी चुनाव नहीं लड़ सकते है ऐसे में पुलिस अ•िायोजन निदेशालय बड़े मुकदमों में न पड़कर छोटे मोटे केसों की मजबूत पैरवी करके सजा दिलाने की कोशिश में लगा है। दो साल तक की सजा के प्रावधान वाले केसों में अ•िायोजन वि•ााग आरोपी को सजा दिलाकर उनके राजनीति के दरवाजे बंद करने की कोशिश में लगा है यदि ऐसा ही होता रहा है तो आने वाले समय में राजनीति में अपराधियों की पनाहगाह नहीं बन पायेगी।

राजनीति में अपराधियों की भागीदारी
यूपी विधानसभा  के 403 विधायकों की सूचीं में से लगभग  47 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) के अनुसार ये दावा किया गया है। 2012 के विधान स•ाा चुनाव के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) के अनुसार 224 विधायकों में से 111 दागी विधायकों के साथ सपा इस दौड़ में सबसे आगे है। भजपा में 25 दागी विधायक, बसपा में 29, और कांग्रेस में 13 दागी विधायक है। एडीआर की रपिोर्ट के अनुसार 189 विधायकों ने पर्चा दाखिल करते हुए अपने खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होने का उल्लेख किया। अगर हम इस आकड़े ही तुलना 2007 के 403 विधानस•ाा सीट के करें तो 140 पर यानी 35 प्रतिशत के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज है। यह संख्या 2012 विधानस•ाा चुनाव से काफी कम थी।

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Sunday, 12 July 2015

मुसलमानों में पैठ बनाने के लिए पार्टियों की अफ्तार पार्टी

इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। रमजान के पवित्र महीने में रोजाअफ्तार के जरिये राजनीतिक दल वोट बैक की राजनीति करने में भी  पीछे नहीं हट रहे है। प्रदेश का मुस्लिम वोट बैंंक सपा सरकार का माना जाता है मगर इस बार नई पार्टियां सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध मारने की कोशिश में लगी है। उनकी इस कोशिश में मुस्लिम समुदाय का पवित्र महीना रमजान जरिया बना हुआ है। इसके अलावा संघ भी  अपनी मुस्लिम विरोधी छवि को तोड़ने के लिए रमजान में रोजा अफ्तार का सहारा लिये हुए है। रोजा अफ्तार के जरिये मुस्लिम वोट बैंक में सेंध मारने की इन पार्टियों की कोशिश कितनी कारगार साबित होगी ये तो समय बतायेगा फिलहाल प्रदेश में आम आदमी पार्टी और औवेशी की एमआईएम पार्टी की मुस्लिम के बीच पैठ बनाने से सपा और बसपा की धड़कने बढ़नी तय है।

मुस्लिम समुदाय की नब्ज टटोलने आये थे ओवैशी
प्रदेया में प्रशासन द्वारा औवेशी को जन सभा पर रोक लगाने के बाद औवेशी ने रोजा अफ्तार के जरिये लोगों में पैठ बनानी शुरु कर दी है।अभी  कुछ दिनो पहले मेरठ में औवेशी की पार्टी एमआईएमआईएम के द्वारा मेरठ में रोजा अफ्तार पार्टी का आयोजन हुआ। जिसमें एमआईएमआईएम के अध्यक्ष औवेशी ने खुद शिरकत की। वो अफ्तार के दौरान लोगो से मिले भी  और इसी बहाने अपनी पार्टी की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की। अंत में वो जाते जाते इस बात का ऐलान भी  कर गये कि अगामी विधानसभा  चुनाव में उनकी पार्टी प्रदेश में चुनाव लड़ेगी। २२उनकी इस घोषणा से विरोधी पार्टियों में हलचल मच गई है।

आम आदमी पार्टी ने भी  करवाया रोजा अफ्तार
दिल्ली में अप्रत्याशित जीत के बाद आम आदमी पार्टी का अगला मिशन उत्तर प्रदेश है। यहां की राजनीति विकास पर कम ओर जातिवाद पर ज्यादा होती है। प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाते  है। इसी के मददे नजर आम आदमी पार्टी ने अभी  से मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति शुरु कर दी है। इसी के तहत रोजा अफ्तार पार्टी का आयोजन पार्टी की तरफ से राजधानी स्थित लालबाग पैलेस में किया गया। जिसमें आप के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय सिंह के साथ शिया सुन्नी धर्मगुरु भी  शमिल हुए। जो राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुस्लिम विरोधी छवि तोड़ने की फिराक में संघ
अपनी मुस्लिम विरोधी छवि को बदलने के लिए बेताब संघ ने अपनी परंपरा को तोड़ते हुए रमजान में पहली बार रोजा अफ्तार का आयोजन किया। यह इफ्तार पार्टी संसद के एनेक्सी में आयोजित की गयी इस पार्टी में देश की मुस्लिम हस्तियों के साथ ही कई देशों के मुस्लिम राजदूतों ने शिरकत की। संघ से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस रोजा इफ्तार का आयोजन किया था। संघ के इस रोजा इफ्तार को मुसलमानों के करीब आने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मुस्लिम समुदाय के बीच संघ की छवि एक कटटरवादी पार्टी के तौर पर है जिसको बदलने की कवायद में संघ लगी हुई है। यदि ऐसा सं•ाव हुआ तो प्रदेश में अगामी विधानस•ाा चुनाव में संघ समर्थित •ााजपा को चुनावी फायदा मिलेगा।

सपा हर साल कराती है अफ्तार
समाजवादी पार्टी का मुस्लिम समुदाय से और मुस्लिम समुदाय का पार्टी से लगाव जग जाहिर है। पार्टी को प्रदेश का मुस्लिम समुदाय हिजैषी के रुप में देखता रहा है। पार्टी हर साल रमजान में रोजा अफ्तार पार्टी करवाती है। इस रोजा अफ्तार में मुख्यमंत्री से लेकर पार्टी के कई बड़े नेता शिरकत •ाी करते है। हाल ही में राजधानी के ऐशबाग ईद गाह मे पार्टी की नगर इकाई द्वारा रोजा अफ्तार का आयोजन करवाया गया था जिसमें शिवपाल अहमद हसन जैसे बड़े नेता शामिल •ाी हुए थे।

#पार्टियों का  रोज़ा अफ्तार #सपा #संघ #भाजपा #उत्तर प्रदेश चुनाव २०१७

Wednesday, 8 July 2015

यात्रियों के लिए बने बस स्टॉप पर अवैध कब्जे


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। सिटी बस सेवा के चलते शहर में जगह जगह पर बस स्टॉप बने हुए थे इन बस स्टापो पर बस को रुकना होता है जहां से यात्रियों को बस मिलती है। वर्तमान समय में महानगर में अनेक स्थानों पर बनाए गए बस स्टॉप पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जे कर लिए हैं। बस स्टाप पर अवैध कब्जा करके दुकान खोल कर बैठे हैं तो कहीं पर सब्जियों की दुकान रखकर बैठे हैं। इतना ही नहीं शहर के कई बस स्टापों पर बसे रुकती तक नहीं है। इसके अलावा बस स्टाप रिक्शा वालों की पनाहगाह बनते जा रहे है। गर्मी बरसात और जाडे में ये बस स्टाप इनके लिए छत का काम करते है। ये बस स्टाप को जिन उददेश्य के साथ खोला गया था वो उददेश्य से उनका पालन नहीं हो रहा है बल्कि अवैध कब्जेदारों के लिए ये स्टाप जन्नत साबित हाक रहे है।

शहर के ज्यादातर स्टाप पर अवैध कब्जा
सिटी बस स्टाप पर अवैध रूप से चल रहीं दुकानें हटाई जाएंगी। सिटी ट्रांसपोर्ट की ओर से शहर के 83 बस स्टापों का सर्वे किया गया। जिसमें से ज्यादातर बस स्टापों पर लोगो ने अवैध कब्जा कर रखा है यहां पर यात्रियों को बस का इंतजार नही करना पड़ता बल्कि वहां पर पान मसाला, सिगरेट सब्जी और स्टैंड के रुप में ये बस स्टापो का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है। वि•ााग •ाी इस अवैध कब्जे को रोकने में असफल साबित हो रहा है।

क्षतिग्रस्त तक हो गये है बस स्टाप
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश बस स्टापों की हालत ऐसी है कि वहां पर जानवर •ाी बैठना नहीं पसंद करते। इसके अलावा इन बस स्टापों पर कब्जा करने वालो ने बैठने की सीटे तक निकाल दी है। बस स्टाप की छते जर्जर हालत में है उसमें से बरसात में पानी और गर्मी में धूप आती रहती है जिससे यात्रियों को आराम के बजाय तकलीफ ज्यादा उठानी पड़ती है। सिटी ट्रांसपोर्ट के दो अधिकारियों की टीम ने शहर के 83 बस स्टापों का सर्वे किया था।

कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति
बस स्टापो पर अवैध रुप से कब्जा कर के उन जगहों पर पान मसाले की दुकाने और सब्जि की दुकानें लगी हुई है। जिसपर जिम्मेदार वि•ााग आँख बंद करे हुए बैठा है। जब क•ाी कोई ऊपर से आदेश आता है तो आनन फानन में कार्रवाई के नाम पर एक दो बस स्टाप को खाली करवा दिया जाता है। जिससे पूरे अ•िायान का नाम देकर बंद कर दिया जाता है। शहर के कई बस स्टाप ऐसे है जहां पर यात्री तो खड़े होते है मगर बस नहीं रुकती है। इसके साथ ही उन स्टापों पर •ाी कोई कार्रवाई नही होती है जहां पर पार्किंग बना रखी है।

लिया जाता है सुविधा शुल्क
शहर के कई स्टाप ऐसे है जहां पर लोगो ने अवैध कब्जा कर दुकाने खोल रखी है इसके बदले में वो पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों को सुविधा शुल्क देते है। वि•ाागो की मिली •ागत से अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद है। प्रतिदिन और प्रति सप्ताह के हिसाब से  इन दुकान दारों से सुविधा शुल्क लिया जाता है। सूत्रो के अनुसार पान की गुमटी से 50 रुपये व सब्जी की दुकानों से 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पैसा लिया जाता है।

इन स्टापों पर अवैध कब्जा
बस स्टापों की जर्जर हालत और अवैध कब्जे के मामले में खुर्रम नगर रहीम नगर, मुंशी पुलिया से लेकर चारबाग तक के बस स्टापो पर अवैध कब्जेदारों का बोलबाला है। शहर के 70 प्रतिशत बस स्टाप या तो खराब है या तो उनपर अवैध कब्जेदारो का बोलबाला है। इनके कब्जे से सबसे ज्यादा दिक्कत जो होती है वो यात्रियो को होती है। यात्रियो की सुविधा के लिए बने ये बस स्टाप आज उनकी ही परेशानियों को बढ़ा रहे है।

प्रदेश में बिना मुख्मंत्री चेहरे के चुनाव लड़ेगी भाजपा


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। भाजपा के पतन से लेकर उत्थान तक उत्तर प्रदेश का बहुत बड़ा योगदान रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के नेतृत्व में भजपा ने 55 सीटे जीत कर इतिहास रच दिया था मगर फिर पार्टी के अंदर मची खीचतान ने पार्टी को समेट कर मात्र 10 सीटो पर पहुंचा दिया। पार्टी एक बार फिर से प्रदेश में अपने पतन से उत्थान की ओर जाती दिखाई दे रही है। इसबार पार्टी अलाकामान पिछल्ली बार की गलतियों को नहीं दोहराना चाहते है इसलिए  प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा  चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बिना किसी मुखौटे के चुनाव में उतरेगी। सूत्रों के अनुसार पार्टी विरोधी अंदरुनी गतिविधियों को रोकने के लिए आलाकमान ने फैसला किया है कि पार्टी बिना किसी मुख्यमंत्री के चेहरे के चुनाव लडने की तैयारी में है।

गुटबाजी के चलते नहीं होगा मुख्यमंत्री उम्मीदवार
भाजपा  लगभग  दो दशक के ऊपर के समय के बाद प्रदेश में पार्टी का रुतबा बढा है। 16वी लोकसभ  में भाजपा ने जिस मोदी चेहरे के दम पर चुनाव लड़ कर अ•ाूतपूर्व चुनाव जीता था  वो ही चेहरा इस बार के प्रदेश विधानसभा  चुनाव में भी  होगा। पार्टी के अंदर मची उठा पटक और खीचतान के चलते पार्टी के चिंतक इस बार पार्टी को बिना चेहरे के साथ सीएम इन वेटिंग की तर्ज पर चुनाव लड़ने के मूड़ में है। प्रदेश में भाजपा  की सबसे बड़ी मुश्किल अपने ही लोगों को समझाना ओर गुटबाजी से दूर रखकर चुनाव लड़ना है। प्रदेश की भाजपा  कमेटी के अंदर हमेशा ही खीचतान और गुटवाजी चलती रहती थी जिसके कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है।

पार्टी के नेताओं ने शुरु की मुहीम
प्रदेश भाजपा के कई बडे नेताओं और उनके समर्थकों ने फेसबुक और सोशल मीडिया पर अपने को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताते हुए जंग छेड दी है। इन बड़े नेताओं में प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई से लेकर योगी आदित्यनाथ, वरुण गांधी, उमा भारती, दिनेश शर्मा, जैसे बड़े नेता शामिल है। इन नेताओं की ये राजनैतिक महत्वाकांक्षा ही पार्टी के अंदर फूट डालजने का काम कर रही है। ये भी  एक वजह है कि पार्टी आलाकमान मुख्यमंत्री का चेहरा नही घोषित करना चाहता। यदि किसी एक को भी  पार्टी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रस्तुत करती है तो ऐसे में पार्टी के अंदर जो भूचाल मचेगा वो पार्टी को पहले की तरह गर्त में लेकर चला जायेगा जैसे अटल बिहारी के चुनाव के बाद हुआ था। उस समय भी  भाजपा  के प्रदेश नेताओं की आपसी खीचतान का ही नतीजा था पार्टी पतन की ओर अगसर हो गई थी। इस बार अलाकमान हर हाल में प्रदेश चुनाव में अपनी धमक जमाने की कोशिश में लगा है।

ओम मथुर के जरिये लगाम
अगामी विधानसभ  चुनाव के लिए प्रदेश प्र•ाारी के तौर पर ओम मथुर को बनाया है। ओम मथुर को प्रदेश प्र•ाारी बनाने के पीछे का मकसद पार्टी के अंदर गुटबाजी को रोकना है। बाहरी व्यक्ति होने के कारण पार्टी में एक दूसरे के विरोधी नेता से वो अलग तौर पर भी  जुडे रहेगे जिससे वो पार्टी के अंदर हो रही खीचतान को रोकने में सफल हो सकेगे। ओम मथुर को लाने का मुख्य कारण पार्टी के अंदर विरोध स्वर को दबाने का है यदि पार्टी किसी यही के नेता को प्र•ाारी बनाती तो ये तय था कि विरोध के स्वर बुलंद हो जाते और चुनाव से पहले ही पार्टी को अपने ही लोगों से लड़ना पड़ता ।

कांग्रेस की तर्ज पर भाजपा 
कांग्रेस पार्टी का एक नियम रहा है कि वो बिना किसी चेहरे के चुनाव लड़ती है और यदि चुनाव जीत जाती है तो सर्वसम्मति से चुने गये प्रत्शशियों के माध्यम से उन्ही के बीच का नेता चुन लेती है। इस तरह पार्टी में विरोध के आसार काफी कम होते है। भाजपा हमेशा से एक चंहरे के साथ चुनाव लड़ती आई है लोकसभा  चुनाव भी  उसने मोदी के चेहरे के साथ लड़ा मगर विधानसभा  चुनाव में परिस्थितियां अलग होती है।
अपने अंदर हो रहे बुलद विरोध स्वरों की वजह से पार्टी बिना चेहरे के ही प्रदेश में होने वाल ेविधानस•ाा चुनाव में लड़ेगी।

प्रदेश में भाजपा का इतिहास
मौजूदा हालातों पर नजर डाले तो कभी  उत्तर प्रदेश की राजनीति में नंबर एक पर रहने वाली भाजपा एक नंबर से चार नंबर पर कैसे पहुँच गई, इसका जवाब किसी भी  बड़े भजपा नेता के पास नहीं है। क्योकि इन्ही नेताओं के दम पर ही पार्टी उत्थन से पतन की ओर अग्रसर हुई थी। सामूहिक नेतृत्व के आधार पर चलने वाली •ाारतीय जनता पार्टी कब व्यक्तिवादी और क्षेत्रवादी बन गई, इसका आ•ाास पार्टी नेताओं को तब हुआ जब पार्टी गर्त में जाने लगी। आज •ााजपा की हालत ये है कि जो पार्टियाँ अपने प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव कार्यकतार्ओं के सुझाव से करती थी, आज उस पार्टी के अध्यक्ष दिल्ली से मनोनीत होने लगे हैं। •ााजपा का यूपी में एक सुनहरा दौर तब था जब प्रदेश में कल्याण सिंह, कलराज मिश्र, लालजी टंडन, ओम प्रकाश सिंह और राजनाथ सिंह ये पांच प्रमुख नेता हुआ करते थे लेकिन 1999 में कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने की मुहिम से •ााजपा में जो गुटबाजी शुरू हुई उसने इस सामूहिक नेतृत्व को छिन्न-•िान्न कर दिया। लालकृष्ण आडवाणी के करीबी कल्याण सिंह सीधे अटल बिहारी वाजपेयी से टकराए। इससे पार्टी में अगड़ों और पिछड़ों का सामंजस्य टूट गया। कल्याण सिंह को दोबारा पार्टी में लाया गया।1993 में राम लहर में मुलायम कांशीराम का गठजोड़ •ाी हवा हो गया था। 'जय श्रीराम' का नारा कामयाब रहा। इस गठबंधन को तोड़ने और 'हिन्दू समाज की एकजुटता के लिए •ााजपा ने मायावती को मुख्यमंत्री बनवाया। •ााजपा के पतन में बसपा सुप्रीमो मायावती ने अहम •ाूमिका नि•ााई। मायावती ने •ााजपा से जुड़े ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध मारकर •ााजपा के पतन की नई इबारत लिख दी थी। मायावती ने धीरे-धीरे •ााजपा के सवर्ण मतदाताओ को सत्ता में हिस्सेदारी का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया। पार्टी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी बीमार होकर सक्रिय राजनीति से अलग हैं। अब केवल वह •ााजपा मुख्यालय में पोस्टरों और बैनरों पर ही दिखाई देते थे। मई, 2007 में विधानस•ाा चुनाव कल्याण सिंह के नेतृत्व में लड़ा गया,मगर उन चुनावो में बसपा आंधी के सामने स•ाी राजनैतिक पार्टियों ने दम तोड़ दिया।  इस बार •ााजपा अगडो ओर पिछडों को लेकर ही चलने की नीयत में है लोकस•ाा 2014 के चुनावों ने •ााजपा में एक बार फिर उम्मीद जगा दी है कि वो प्रदेश की राजनीति में चौथे नंबर से ऊपर उठकर एक नंबर की हैसियत पा सकती है।

ऐसी लापरवाही तो क्यों ना हो लूट


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। राजधानी में अपराधियों के हौसले बुलंद है और कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। लूट हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए लाख कोशिश करने के बाद •ाी इन घअनाओं पर रोक लगाने में नाकाम रही है। साल के शुरुवाती छह महीने में ही कैश लूट की तीन बड़ी घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिये है। इन घटनाओं को रोकने में जितनी जिम्मेदारी पुलिस की होती है उतनी ही पैसा ले जाने वाली सिक्योरिटी कंपनियों की •ाी होती है। इन सिक्योरिटी गाड़ियों में सुरक्षा के जो मानक होते  है उनको वो पूरा नहीं कर रहे। लगातार हो रही घटनाओं के बाद •ाी सिक्योरिटी कंपनी पैसे ले जाने में गं•ाीरता नहीं बरत रही है।

लापरवाही हादसो की वजह
बैंक से पैसे को इधर से उधर ले जाने के लिए  लगी हुई कैश वैन की लापरवाही •ाी हादसे की मुख्य वजह है करोड़ो रुपये को ले जाने वाली गाड़ियों की लापरवाही तो देखो कि गाड़ी में पैसा है और गाड़ी का दरवाजा खुला है। ऐसे किसी एक दिन का नहीं है। शहर के अंदर से पैसा ले जाने वाली कैश वैन अक्सर शहर के बाहर निकलते ही गाड़ी के दरवाजे खोल देते  है। सुरक्षा के लिए दी गई बंदूक •ाी ऐसे में कोई काम नहीं करती है। जब शहर के अंदर ही अपराधी लूट की इतनी बड़ी घटना को खुले तौर पर अंजाम दे सकते है तो शहर के बाहर तो उनके लिए कोई दिक्कत ही नहीं होगी। कैश वैन के कर्मचारियों की ये लापरवाही उनकी जान पर •ाी •ाारी पड़ सकती है। मगर इसके बाद •ाी वो अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे। लापरवाही की सबसे बड़ी घटना कैश वैन से एक करोड़ रुपये की लूट थी जिसमें पैसा ट्रांसफर करने गये कर्मचारी ने वैन का दरवाजा ही नहीं लॉक किया था और वहां पर निगरानी के लिए खड़ें कर्मचारी •ाी लापरवाही के चलते वैन से लूट हो गई और पास में खड़े कर्मचारियों को •ानक तक नही लगी।

हाल की घटनाएं
लखनऊ के हसनगंज इलाके में  बदमाशों ने तीन गार्डों की हत्या कर दिन-दहाड़े लाखो  की लूट की वारदात को अंजाम दिया। बदमाश लखनऊ यूनिवर्सिटी के नजदीक स्थित एचडीएफसी बैंक के कैश वैन से करोड़ों का कैश लेकर फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक के एटीएम में कैश ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही थी तभी  पल्सर बाइक पर सवार दो बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। बदमाशों ने कैश वैन में स्थित तीन  गार्डों को गोली मार दी और करीब 55 लाख रुपए लेकर फरार हो गए।
2::::जनवरी माह में सबसे व्यस्त राणा प्रताप मार्ग पर मौजूद बैंक आॅफ बड़ौदा के एटीएम में पैसे डालने गई एक वैन से 1.37 करोड़ रुपये की लूट ने पुलिस के होश उड़ा दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, ड्राइवर समेत तीन लोग राइटर सेफगार्ड सिक्यॉरिटी एजेंसी की वैन से दीप होटेल के सामने वाले एटीएम में पैसे डालने गए थे। तीनों कर्मचारी वैन से 55 लाख रुपये निकालकर एटीएम के अंदर चले गए, लेकिन वैन का दरवाजा लॉक ही नहीं किया। जब तक तीनों एटीएम से बाहर लौटते, उसमें रखे करीब 1 करोड़ 37 लाख रुपये लूट लिए गए। बदमाशों ने इतनी सफाई से इस वारदात को अंजाम दिया कि वैन में मौजूद तीन कर्मचारियों को इसकी कानोकान खबर तक नहीं लग सकी।

3::: अभी  हाल में ही बाइक सवार तीन बदमाशों ने सरोजनीनगर स्थित गडौरा पुल के पास दिनदहाड़े एटीएम कैशवैन के चालक समेत तीन कर्मचारियों को गोली मारकर छह लाख पचपन हजार रुपये लूट लिए। अचानक हुए हमले में कर्मचारी कुछ समझ पाते उससे पहले ही बदमाशों ने गोलियों की बौछार शुरु कर दी जिसमें घायल एक कर्मचारी की ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई।

Monday, 22 June 2015

विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पा रहे दल


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। देश प्रदेश के  विकास के लिए जितनी अहमियत सत्ता पक्ष की होती है उतनी ही अहमियत विपक्ष की भी  होती है। यदि विपक्ष मजबूत नहीं होगा तो सरकारें भी  काम नहीं कर पाती। विपक्ष में रहते हुए भी  पार्टियां प्रदेश के विकास में अहम •ाूमिका निभाति  है। विपक्ष की भूमिका हमेशा ही रचनात्मक होती है। व प्रदेश के लिए सकारात्मक होती है। लोकतंत्र के लिए सरकार के साथ विपक्ष का भी  होना उतना ही जरुरी है जिस तरह हर कार्य के लिए सरकार की जवाबदेही बनती है वैसे ही विपक्ष की भी भूमिका  होती है कि वो सरकार के कार्यों पर नजर रखे।

सरकार के कार्यों पर नजर रखना विपक्ष का काम
विपक्ष का काम होता है कि सरकार द्वारा जो कार्य करवाये जा रहे है वो जनहित में है कि नहीं इस पर नजर रखना। कई बार सरकार द्वारा ऐसा कार्य भी  किया जाता है जो पूर्ण रुप से  जनता के हितों के अनुरूप नहीं होता। ऐसे में विपक्ष द्वारा चुप रह जाना एक तरह से सरकार का मौन समर्थन करना होता है। यहीं  से शुरु हाती है विपक्ष की भूमिका   क्योंकि सरकार के किसी भी  गलत निर्णय का विरोध करना उनका नैतिक कर्तव्य है। विपक्ष का काम सरकार को ऐसा करने से रोकना जो जनता के हित में अनुकूल न हो कई बार सरकार अपना अड़ियल रूख छोड़ने को तैयार न हो तो विपक्ष सदन के भीतर और बाहर अपना विरोध प्रकट कर सकता है। विपक्ष को यह अधिकार है कि अगर सरकार जनहित की भावनाओं को अनदेखी करते हुए कोई नीतिगत फैसला लेती है तो वह सदन में सरकार से उस पर बहस की मांग कर सकता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर सरकार को रोकने के लिये सदन के भीतर कार्य-स्थगन प्रस्ताव ला सकता है।

इसके अलावा लोकतांत्रिक तरीके से जन-जागरुकता अभियान चलाकर आम जनता को सरकार की सच्चाई बताकर उसे सरकार के विरुद्व खड़ा कर सकता है। विपक्ष चाहे तो धरना, प्रदर्शन, घेराव आदि के माध्यम से सरकार के विरुध्द जन-आंदोलन चला सकता है। इस तरह से वह सरकार को अपना जन-विरोधी निर्णय वापस लेने के लिये मजबूर कर सकता है।

प्रदेश में विपक्ष की स्थिति नाम मात्र
प्रदेश में मौजूदा सपा सरकार पूर्ण बहुमत में है जिस कारण वो फैसले लेने के लिए बाध्य नहीं है। प्रदेश में दूसरे नंबर की पार्टी बहुजन समाज पार्टी विपक्ष की भूमिका मिका में बिल्कुल भी  नजर नहीं आ रही है।  2012 के विधानसभा  चुनाव में करारी शिकस्त पाने के बाद से बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती तो जैसे गायब ही हो गई इसके अलावाप्रदेश की तीसरे और चौथे नंबर पर रही कांग्रेस और •ााजपा की पार्टियों ने कुछ हद तक विपक्ष की भूमिका निभाने  की कोशिश की मगर वो भी  पूर्ण रुप से विपक्ष की भूमिका  निभा  नहीं पाया। यही कारण है कि प्रदेश में बढ़ रहे क्राइम पर  सरकार पर कोई दबाव नहीं दिख रहा है क्योकि प्रदेश कि मुख्य विपक्षी पार्टी बसपा ने विपक्ष की भूमिका ही नहीं निभाई  जिससे प्रदेश सरकार पर कोई दबाव नहीं बना। इसके अलावा कई मुददों पर विपक्षी दल •ााजपा और कांग्रेस ने सरकार पर करारे वार किये मगर उनको जमीन पर उतारने पर जनता के बीच लाने में असफल रहे।
मुददे कई पर नहीं हुआ विरोध
पीसीएस परीक्षा का पेपर लीक, बिगड़ती कानून व्यवस्था हो, संप्रदायिक दंगे हो, सरे आम मर्डर हो, लूट हो, पत्रकार को मंत्री के खिलाफ लिखने पर जलाकर मार डालने वाली घटना हो, बेलगाम मंत्रियों के ऊपर लग रहे आरोपों पर •ााजपा कांग्रेस ने जुबानी जंग तो शुरु की मगर उसको जमीन पर नहीं उतार पाये जिसके कारण कुछ समय बाद ये सब मुददे बंद हो गये ।अभी  हाल में ही पत्रकार को जिंदा जलाकर मार डाला गया जिसमें सरकार के मंत्री का नाम शमिल है इसके बावजूद विपक्षी पार्टियों ने बयान जारी कर विरोध प्रकट किया बल्कि ये एक ऐसा मुददा है जिसमें सरकार को घेरा जाये तो होने वाले चुनाव में सरकार को नुकसान और विपक्ष को फायदा मिल सकता है। तीन साल में सरकार के विरुद्व कोई भी  बड़ा आंदोलन नहीं किया गया। पेपरबाजी ओर बयानबाजी तो खूब हुई।
इस वक्त प्रदेश में सरकार के विरुद्व सबसे बड़ी पार्टी के रुप में •ााजपा उभर  के सामने आ रही है । लोकसभा के चुनाव के बाद भाजपा  के दिन बदल गये जनता में एक बार फिर इस पार्टी में विश्वास जाग उठा हुआ है। अपने तीखे तेवर से दिल्ली का सिंहासन हासिल करने के बाद प्रदेश में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है लेकिन पार्टी प्रदेश सरकार के खिलाफ उस स्तर पर विरोध कर विपक्ष की भूमिका  नहीं निभा  रही जो उसको निभाना  चाहिए। पार्टी के ऊपर से लोकसभा  चुनाव की जीत की खुमारी उतरने का नाम ही नही ले रही है। ऐसे में वो प्रदेश सरकार का विरोध करे भी  तो कैसे। इसी तरह कांग्रेस का भी  हाल है फिलहाल तो कांग्रेस अभी  अपनी जमीन तैयार करने में लगे है। लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए काफी मायने रखते है। प्रदेश की जनता में सरकार द्वारा कराये गये विकास कार्यों का बखान किया जा रहा है जिसको जनता जान भी  रही है। मगर प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था और सरकार के भ्रष्ट  मत्री व कानून को ताक पर रखने वाले नेताओं की भी  चर्चा कुछ दिन जो होती है मगर फिर वो  खत्म हो जाती है। वजह विपक्ष का अपना काम ढंग से न नि•ााना है। विपक्ष का मजबूत होना इस बात का प्रमाण होता है कि प्रदेश में जंगलराज या एकाधिकार नहीं हो सकता।
#सपा #विपक्ष #बसपा #प्रदेश #भाजपा 

Wednesday, 17 June 2015

पंचायत चुनाव की बिछने लगी बिसात


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट मात्र से ही ग्राम पंचायतो में संभावित  प्रत्याशियों ने अपना प्रचार शुरु कर दिया है। पंचायत चुनावों का औपचारिक एलान भले ही अभी  न हुआ हो, लेकिन चुनावी बिसात पर वोटो की मोहरे बिछने लगी है। पंचायत के ग्राम प्रधान किसी भी  हाल में बचे कार्यकाल के लिए मन मुताबिक काम करवा कर लोगों के बीच फिर से विकास का नारा देने की तैयारी में लगे हुए है। वहीं दूसरी तरफ पुराने प्रधान प्रत्याशी अपना रुतबा कायम करने के लिए मौजूदा प्रधान पर आरोप पर आरोप लगाकर उनके वोट बेंक में सेंध मारने की तैयारी कर रहे है। आलम ये है कि पंचायत चुनाव में वो स•ाी हथकंडे अपने जा रहे जो देश और प्रदेश के सेंट्रल हॉल में पहुॅचने के लिए होते है। साम दाम दंड भेद का ऐसा चक्रव्यूह रचा जाता है कि सामने वाला समर्पण के अलावा किसी काम का नहीं रहता कुछ ऐसा ही राजधानी समेत ग्रामीण इलाकों में होने लगा है। शाह और मात का खेल इतना बुरा है कि लोग खून बहाने से भी  नहीं चूकते। ग्राम पंचायत के चुनाव अपनाये जाने वाले रणनीति पर प्रकाश डालती एक रिपोर्ट

हाल की कुछ घटनाएं
पंचायत चुनाव हलाकि अक्टूबर या सितबर में होने है मगर उनको लेकर संभावित प्रत्याशियों ने अभी  से तैयारियां तेज कर दी गई है। इसके लिए वो साम दाम दंड भेद वाली नीति का पालन कर रहे है। हाल ही की कुछ घटनाओं ने ये साबित कर दिया है कि इसबार चुनाव सिर्फ पैसे या व्यक्तिगत रुप से नहीं लड़ा जाने वाला है। इस बार के चुनाव में पिछल्ले बार के चुनाव से ज्यादा केस और खून खराबा होने वाला है।
केस एक- अभी  हाल ही में कुछ दिन पहले अमेठी में प्रधान ने अवैध कब्जे से रोका तो दूसरे पक्ष ने उसको जमकर पीटा और लहूलुहान कर दिया। इसमें आरोपी प्रधान पद का संभावित उम्मीदवार है। इसलिए इस घटना को पंचायत चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है जो काफी हद तक सही भी  है।
केस दो- उन्नाव क्षेत्र में प्रधानी चुनाव की पुरानी रंजिश के चलते विरोधी पार्टी ने 7 से 8 साल के बच्चों पर गैंगरेप का आरोप लगा दिया। यहीं नहीं उनके खिलाफ एफआईआर भी  दर्ज हो गई।

केस तीन- बेंती गांव में पूर्व प्रधान ने मौजूदा प्रधान पर विकास कार्य के लिए आये पैसे में 8 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया है। पूर्व प्रधान ने इसकी शिकायत जिला प्रशासन से भी  की है जिसकी जांच चल रही है।


शुरु हुई खेमेबाजी
पंचायत चुनाव के त्रिस्तरीय चुनाव की सुगबुगाहट मात्र से ही  प्रत्याशियों ने होर्ल्डिंग्स और बैनर के माध्यम से प्रचार शुरु कर दिया है। इसके साथ ही घर घर जाकर संपर्क भी  शुरु कर दिया है। अपनी दावेदारी को मजबूत करने के चौपाल लगनी भी  शुरु हो गई है शाम होते ही सं•ाावित प्रत्याशियों के घरो के आगे जमावड़ा बताता है कि पंचायत चुनाव की तैयारियां अभी  से शुरु हो गई है।
पैसे का जमकर हो रहा है इस्तेमाल
पंचायत चुनाव में पिछल्ली बार एक प्रत्याशी पर कम से कम बीस लाख रुपये का खर्चा बैठा था इस बार के पंचायत चुनाव के माहौल को देखते हुए ये खर्चा बढ़ कर चालीस लाख तक जा सकता है। इतने पैसे में तो विधायकी के  चुनाव लड़े जाते है। मगर वर्तमान समय में पंचायत के चुनाव में इतना पैसा खर्च हो रहा है इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंचायती चुनाव में कितना फायदा होता है। लोग चुनाव के लिए अपनी जमीने तक बेंच रह े है।

शुरु हुई उठा पटक
पंचायती चुनाव के नजदीक आते ही पंचायती क्षेत्रो में एक बार फिर पुरानी रंजिशे पनापने लगी है। पुराने प्रत्यशियों ने मौजूद प्रधान पर घोटालों का आरोप लगा कर उनको कानूनी दांव पेज में उलझाना शुरु कर दिया है। इसके साथ एक दूसरे के समर्थकों पर फर्जी मुकदमें करवाकर उनको जेल तक भेजने की तैयारी होने लगी है। इस लड़ाई का सीधा सा मकसद है कि अपनी ताकत का एहसास करवाना। अपनी ताकत के जरिये चुनाव लड़ने वाले लोग खून खराबा करने में •ाी पीछे नहीं हटते है। चुनाव के नजदीक आते ही गांवों में प्रत्याशियों ने अपने गुट को मजबूत करना शुरु कर दिया है। विधान स•ाा चुनाव की तर्ज पर ही यहां पर भी  अपने विरोधियों को फर्जी केस में फंसाकर उनको चुनाव लडने से वंचित करने की योजना पर काम हो रहा है जिसमें पैसे के साथ पुलिस •ाी बखूबी साथ दे रही है।

राजनैतिक पार्टियों का प्रत्याशियों को संरक्षण
इन चुनावों पर पार्टियों का द्वारा प्रत्याशियों को संरक्षण दिया जाता है क्योकि बड़े चुनावों में निर्वाचित  ग्राम प्रधान जिला पंचायत सदस्यों की बड़ी भूमका होती है। जिसको लेकर पार्टियां गं•ाीर हो चली है। उनकी पार्टी को विधान सभा  और लोकसभ  के चुनावों में वोट मिल सके। ऐसे में बड़ी पार्टियों के लिए जमीन तैयार करने का काम ये चुनाव करते है।

वर्जन
प्रधानी के चुनाव को लेकर तनाव की बात सामनेआयी है। किसी भी दशा में फर्जी मुकदमें दर्ज नही किये जायेंगे। सभी  थानों को इसके लिये निर्देशित कर दिया गया है। सभी  मामलों में पुलिस को जांच के बाद कार्यवाही करने के कहा गया है। डीआईजी आर के चतुर्वेदी

#पंचायत #चुनाव #बिसात #गाँव 

Monday, 15 June 2015

पंचायती चुनाव की सुगबुगाहट बदलने लगी गावो की फिजा


जीस्ट
इस समय पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट मात्र से ही गांवो और पंचायती चुनावी क्षेत्र की फिजा बदल गई है। अब सुबह से लेकर शाम तक चौपाल लगने लगी है साथ ही शाम को मिलने वाली दवा भी  सुबह से मिलने लगी है। इससे इतर प्रत्याशी अपनी जीत के लिए सभी  समीकरण को बनाने में लगे हुए है। प्रधानी का लालच कहे या रुतबे का जलवा कि भाई भाई  के खिलाफ है बाप बेटे के खिलाफ है। इस चुनाव में गांव की तस्वीर बदलने की बात कहके लोग अपने जीतने के लिए हर वो हथकंडा अपना रहे है जो बड़े बड़े चुनाव में अपनाया जाता है। पैसे से लेकर जाति बिरादरी धर्म तक की राजनीति करने में लोग पीछे नहीं हट रहे है। इससे गांव के विकास के लिए होने वाले पंचायत  चुनाव अपना मूल रूप से भटक  चुके है। प्रदेश में पंचायत चुनाव अब पैसे और बंदूक के नोंंक पर होने लगे है जिससे गांव की ही नहीं बल्कि देश की भी  चुनावी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गया है। खर्च के मामले में विधायकी के चुनाव भी  फेल है।



इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। पंचायती चुनाव भारतीय राजनीति की पहली और महत्वपूर्ण सीढ़ी है। देश की राजनीति की शुरुवात ही पंचायती चुनाव से होती है। आजादी के बाद से शुरु हुए पंचायती चुनाव में पहले की अपेक्षा आज के दौर में काफी बदलाव आ गये है। राजनीति की नींव ही अब काफी हद तक कमजोर हो गई है। इन चुनावों में भी  अब साम दाम दंड का उपयोग होने लगा है। वर्चस्व और प्रधानी रंजिश के चलते गांव की गलियां खून के रंग में रंग जाती है। पैसे के साथ खून का भी  बहना अब आम हो गया है। पिछल्ले वर्ष चुनाव में पैसा का बोलबाला था इस बार का भी  पंचायत चुनाव रुपये और बंदूक के दम पर होता नजर आ रहा है। पंचायत चुनाव के होने में अ•ाी तीन से चार महीने बाकी है। प्रशासन की तैयारी अभी  पूरी नहीं हुई है मगर प्रधानी का चुनाव लड़ने वाले लोगों ने अपनी पूरी तैयारी कर ली है। परियीमन से लेकर वोटो के वर्गीकरण तक में सभी  प्रत्याशी अपनी जीत को सुनिश्चित करने में लगे हुए है। इसबार के चुनाव में पैसा बोलता है कि तर्ज पर होने जा रहा है। प्रशासन इसको रोकने में कितना सफल होगा ये तो वक्त ही बतायेगा।

होर्ल्डिंग्स के जरिये शुरु हुआ प्रचार
एमएलए और एमपी की तर्ज पर प्रधान प्रत्याशियों ने भी  होर्ल्डिंग्स के जरिये अपना प्रचार प्रसार शुरु कर दिया है। अपने मनपसंद नेता की तस्वीर के साथ अपनी तस्वीर लगाकर अपना रुतबा दिखाने में ये प्रधान प्रत्याशी •ाी पीछे नहीं है। होर्ल्डिंग्स पर पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में प्रधान प्रत्याशियों ने अपने घोषणा पत्र भी  बनवाने शुरु कर दिये है जिसमें पंचायती क्षेत्र की प्रमुख समस्या का अंकित किया जा रहा है।

परिसीमन को लेकर मंत्रियो और नेताओं ने शुरु की जोर आजमाइश
आजादी के बाद देश में जब पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई, तब गांधी के ग्राम्य स्वराज्य को पूर्ण करने का सपना था। तब यह सोचा भी  नहीं गया था कि पंचायतें इस तरह कलह का अड्डा बनेंगी, गांव के गांव विभजित होंगे। अब तो खेती बेचकर चुनाव लड़े जा रहे हैं। पहले पंचायत के चुनाव में गांव इकट्ठा होता था, हाथ उठाकर वोट करता था और प्रधान चुन लिया जाता था। गांव में ही न्याय पंचायतें छोटे-मोटे विवाद सुलझा देती थीं। अब न्याय पंचायतें समाप्त हो चुकी हैं। पंचायत चुनाव में इस बात पर जोर आजमाइश हो रही है कि पंचायतों को कैसे आरक्षित कराया जाए या आरक्षित होने से बचाया जाए। इसके लिए विधायक से लेकर मंत्री तक तैयार बैठे हैं। राजनीतिक दल अपने-अपने स्वार्थ को सामने रख कर पंचायतों का परिसीमन कराते रहे हैं। यही कारण है कि 20 साल में पंचायतों के परिसीमन पर कोई एक नीति नहीं बन पाई।
जुआ की तरह है पंचायत चुनाव
लोग का मानना था कि प्रधान बनकर लोगों की सेवा की जाती थी मगर वर्तमान समय में ऐसा बिलकुल नही है पानी की तरह पैसा बहाने का मतलब है कि कि वो समाज सेवा नही बल्कि चुनाव जीत कर उस पैसे को ब्याज समेत वसूल करना है। सरकारी योजनाओ का अपने हित के लिए इस्तेमाल करके उसका फायदा उठाते है। इसके अलावा शहर से लगे गांव के जमीन के रेट वर्तमान समय में आसमान छू रहे है जिससे प्रधान ग्राम समाज की जमीन का सौदा प्रापट्री डीलरो से करके मोटा पैसा वसूलते है। इसके साथ ही जो रुतबा होता है सो अलग।
योजनाओं में पारदर्शिता की कमी से बढ़ा भ्रष्टाचार
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की कमी से •ा्रष्टाचार ज्यादा बढ़ गया है। सरकारी योजनाएं जैसे मनरेगा, मिड डे मिल जनता के लिए कम, प्रधानों और कुछ अफसरों के लिए कामधेनु साबित हुई है। मिड-डे मील के •ाुगतान में  स्कूल के प्रधानाध्यापक और प्रधान के हस्ताक्षर होते हैं। इन दोनों की मिली •ागत से बच्चो को मिलने वाला खाना या तो इनके घर पहुंच जाता है या बाजार में बिक जाता है। इसके अलावा इंदिरा आवास को लेकर लेन-देन हो रहा है। पंचायते यानी छोटी सरकारों को प्रशासनिक दर से मजबूत नहीं किया गया, लेकिन योजनाओं में आने वाला पैसा स•ाी को दिख रहा है।
चुनाव में खर्च हो जाते है लाखो रुपये
पंचायत चुनाव में पिछल्ली बार एक प्रत्याशी पर कम से कम बीस लाख रुपये का खर्चा बैठा था इस बार के पंचायत चुनाव के माहौल को देखते हुए ये खर्चा बढ़ कर चालीस लाख तक जा सकता है। इतने पैसे में तो विधायकी के  चुनाव लड़े जाते है। मगर वर्तमान समय में पंचायत के चुनाव में इतना पैसा खर्च हो रहा है इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंचायती चुनाव में कितना फायदा होता है। लोग चुनाव के लिए अपनी जमीने तक बेंच रह े है।

परिवार के हिसाब से दिया जाता है पैसा
ग्राम पंचायत चुनाव में जब नोटो के जरिये वोट खरीदने का दौर शुरु होता है तो उसमें परिवार में मौजूद लोगों की संख्या के आधार पर पैसे दिये जाते है जितना बड़ा परिवार उतनी ही मोटी रकम दी जाती है। पिछल्ली बार बड़े परिवार के मुखिया को तीन हजार रुपये तक का एक आदमी के वोट की कीमत दी गई थी। इसबार ये पैसा पांच हजार रुपसे प्रति व्यक्ति तक जा सकता है। इसके साथ ही पैसे पर बिकने वाले वोट पांच सौ रुपये से लेकर पांच हजार तक बिकते है। ये पैसा वोट पड़ने सुबह वाली रत से पहले दिया जाता है।

आकंडे
प्रदेश में ग्राम पंचायतो की संख्या 51914 है जिसमें ग्राम पंचायत वार्ड 652773 है यहां पर कुल मतदाता 113728542 है जिसमें पुरुष 63360787 व महिलाएं 50367755 है। इसके अलावा राजधानी में ग्राम पंचायतो की संख्या 498 है ग्राम पंचायत वार्डों की संख्या 6306 है। राजधानी में कुल मतदाता 1018501 है जिसमें पुरुष मतदाता 539929 है जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 478572 है।
#पंचायत चुनाव #पैसा #

छवि साफ करने की कवायद में पलीता लगाते मंत्री



इन्टरवल  एक्सप्रेस
लखनऊ। सत्ता का नशा कहे या पद का अहंकार ,तमाम नसीहतोें  के बाद भी  समाजवादी पार्टी के नेता और मंत्री सुधरने का नही ले रहे है। आलम ये है कि सपा सरकार के मंत्री और नेता खुद को कानून और सरकार से ऊपर समझने लगे है। नेता अपने सत्ता के  मद में ऐसा चूर है कि समाजवाद का मतलब तक •ाूल गये है। कई बार मुख्यमंत्री व सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव  की चेतावनी का असर देखने को नहीं मिल रहा है। जिससे सपा की न सिर्फसाख पर बटटा लग रहा बाल्कि सरकार की विकास वाली छवि धूमिल करने का काम हो रहा है। जिसका परिणाम ये है कि विरोधियों कोभी  सरकार को घेरने का बैठे बैठाये मौका मिल रहा है। कानून व्यवस्था को लेकर  पहले से ही सरकार चिंतित है वही कानून तोड़ने पर आमदा  इन मंत्रियों  ने इसको सच साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखी है।

विकास पर भारी पड़ते मंत्रियों के कारनामे
एक तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रदेश के विकास की बात कर रहे है  वहीं उनके मंत्री इस विकास को विनाश में बदलने में लगे हुए है। जिसके चलते मुख्यमंत्री की छवि के साथ सरकार का भी  दामन दागदार हो रहा है। मेट्रो परियोजना, महिला सुरक्षा, आईटी हब जैसी प्रदेश की तरक्की के लिए बनी योजनाओं का प्रचार प्रसार न हो पा रहा हो लेकिन मंत्रियों की कारगुजारी पूरे प्रदेश में गूंज रही है। कई बार हिदायत देने के बावजूद मंत्री सुधरने का नाम नहीं ले रहे है। उनके कारनामे भी  ऐसे है कि जिसमेें विकास का मुददा दब जा है और सरकार को चारों तरफ से आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है।

मंत्रियों के कारनामें
हाल ही में पिछड़ा वर्ग राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा पर हत्या का आरोप लगा है पत्रकार जोगेंद्र को पुलिस वालों ने घर में घुसकर पत्नी के सामने मिटटी का तेल डालकर इस लिए फूंक दिया क्योकि  पत्रकार ने फेसबुक पर मंत्री के कारनामों का खुलासा कर दिया था। पत्रकार का पोस्ट एक मंत्री को नगवार गुजरा कि उन्होंने उसकी जान लेली।
2:: राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कैलाश चौरासिया पर एक आरटीओ से मारपीट और रंगदारी मांगने का एक ताजा मामला सामने आया है। आरोप है कि मिर्जापुर के आरटीओ चुन्नी लाल को न सिर्फ अपने घोष बस इतना था कि हाई कोर्ट के आदेश पर बाबू को ज्वाइनिग दे दी थी जिससे खफा मंत्री जी अपने पद प्रतिष्ठा को •ाूल मारपीट पर उतर आये। क्ेलाश चौरासिया पर इसके पहले भी  डाकिया पर मारपीट का आरोप लग चुका है।

3:: बीते दिनो समाजवादी के शिक्षा मंत्री कैबिनेट मंत्री विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह भी  अपनी मर्यादा लांगते नजर आये । गोंडा के व्यापारी पुत्र ने मंत्री के गाड़ी रोके जाने की खबर की कटिंग वाटस अप के ग्रुप में डाल दी थी फिर क्या था मंत्री जी का पारा सातवे आसमान पर पहुंच गया पंडित सिंह ने फोन पर सैकड़ो गाली दी और जान से मारने की धमकी भी  दी।

4::: पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री और योजना आयोग के सदस्य इकबाल अली ने भी  सरकार को बदनाम करने में कोई कमी नही की। फैजाबाद से लौटे हुए बाराबंकी के जैदपुर थाना क्षेत्र में लगे टोल टैक्स में पूर्व मंत्री के गुर्गो ने न सिर्फ टोल कर्मचारियों से मार पीट की बल्कि असलहों से फायरिंग की। पूर्व मंत्री के दंबगाई की ये तस्वीर टोल टैक्स पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने इस मामले में गनर और डाइवर को तो गिरफ्तकार कर लिया वहीं मंत्री को दूसरी गाड़ी में बैठा कर फरार करा दिया।
अगामी चुनाव में उठाना पड़ सकता है नुकसान
समाजवादी पार्टी के नेताओं और सरकार के मंत्री ही पार्टी के लिए खतरा बनते जा रहे है। जिस तरह से मंत्रियों और नेताओं पर आरोप लग रहे है उससे न सिर्फ सरकार की छवि खराब हो रही है बाल्कि उसके मिशन 2017 भी  खतरे में पड़ सकता है। हाल ही में सरकार के मंत्रियों और नेताओं पर हत्या,मारपीट, रंगदारी जैसे संगीन अपराधों में नाम आने से सरकार की काफी किरकिरी हुई है और सरकार की छवि को भी  काफी नुकसान हुआ है। विवादित बयान को लेकर भी  सरकार के कई मंत्रियों का नाम आये दिन आता रहता है। हाल में ही महिलाओं के ऊपर विवादित बयान देने वाले तोता राम मामले का मुख्यमंत्री ने स्वत: संज्ञान में लेते हुए फटकार लगाई थी उसके चंद दिन बाद ही राज्यमंत्री कैलाश चौरासिया द्वारा आरटीओ अधिकारी को मारने पीटने व रंगदारी मांगने का मामला प्रकाश में आया है। इन मामलों से साफ होता है कि सरकार के मंत्री ही मुख्यमंत्री की बात को गं•ाीरता से नहीं ले रहे है। ऐसे में सरकार के अगामी चुनाव की तैयारियों में ये मंत्री ही रोड़ा बनते जा रहे है।


#सपा #२०१७ #मंत्री #अपराध #सपा के मंत्री

Monday, 8 June 2015

सिर्फ जिस्म ही नही ज़हेन भी छालनी कर जाता है एसिड अटेक


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। एसिड अटैक एक अमानवीय और •ायावह अपराध है। एसिड अटैक अपराध हत्या जैसे जघन्य अपराध से •ाी खतरनाक है। एसिड अटैक के शिकार लोग जिंदा तो रहते है मगर समाजिक और मानसिक रूप से उनकी हत्या हो चुकी होती है। वो समाज में मिलने , उठने बैठने का आत्मविश्वास नहीं जुटा पाते। एसिड अटैक में शरीर के जिस •ाी हिस्से पर एसिड पड़ता है वो हिस्सा पूरी तरह झुलस जाता है खास कर जब चेहरे पर पड़ता है तो वो पूरी तरह झुलस जाता है और ऐसी •ायावह हालत में पीड़ित अपने चेहरे को आइने में •ाी देखने का साहस नही कर पाते हैं। ज्यादातर हमले में पीड़ित की मौत तो नही होती मगर उसकी बाकी बची जिंदगी मौत से •ाी बदतर हालत में गुजरती है।
एसिड अटैक का मकसद चेहरे को खराब करना होता हौ एसिड अटैक में चौथी डिग्री का बर्न होता है इसमें त्वचा की पहली नही बल्कि चौथी परत तक जल जाती है इसके घाव सही होने में सालों लग जाते है मगर फिर •ाी पहले जैसी त्वचा नही आ पाती। समय के साथ दिक्कतें कम होने के बजाय और बढ़ जाती हंै जिसके कारण पीड़ित को धूप मे निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।इसके शिकार लोगों को असीम दर्द के साथ समाज से इतर जिन्दगी जीनी पड़ती है।  क•ाी क•ाी उसको अपने ही घर में •ोद •ााव का दर्द झेलना पडता है।

क्या कहता है कानून
18 जुलाई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने कानून में बदलाव करते हुए तेजाब को जहर की श्रेणी में रखा है। अब कोई •ाी दुकानदार बिना लाइसेंस के तेजाब नहीं बेच सकते है। इसके अलावा और •ाी संशोधन हुए है जिसमें पीड़िता को तीन लाख का मुआवजा दिया जायेगा। 15 दिन के अंदर एक लाख रूपये देना अनिवार्य है। आरोपी को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती हैं।

हादसों की वजह
एसिड अटैक की कई वजह हो सकती है जैसे दहेज की मांग न पूरी होना, घरेलू कलाह, शादी का प्रस्ताव ठुकरा देना, प्रेम प्रसंग, दुष्कर्म के प्रयास में विफल होना । ऐसे परिस्थिति होने में एसिड अटैक के केस ज्यादा होते है। लखनऊ में ही प्रेम प्रसंग और दुष्कर्म में विफल होने पर दो लड़कियों पर एसिड अटैक किया जा चुका है

सरकार नहीं करती मदद
सरकार की तरफ से एसिड अटैक में घायल युवती को पंद्रह दिन के अंदर आर्थिक मदद देने का सुप्रीम कोर्ट की तरफ से आदेश दिया जा चुका है मगर इसके बाद •ाी सरकार की तरफ से इनको सही समय पर पैसा नही दिया गया है।
केस 1
समद कथा में काम करने वाली मीना के ऊपर घरेलू कलाह के चलते उनके पति ने ही तेजाब डाल दिया था। आज के समय में वो काम करके अपने तीनों बच्चों की परवरिश कर रही है उनका सबसे छोटा बेटा चौदह साल का हैं।


केस 2
2012 में आलमबाग निवासी कविता पर उनके प्रेमी ने ही तेजाब डाल दिया था। 25 वर्षीय कविता आरोपी नटखेडा निवासी फैज के शाप पर काम करती थी। वही दोनों के बीच अफेयर शुरू हो गया मगर कुछ महीनों बाद फैज की शादी हो गई । शादी हो जाने के बाद •ाी फैज कविता को लगातार रिलेशन में रहने का दवाब डालता रहा। कविता के मना करने पर उसके ऊपर फैज ने तेजाब डाल दिया। घटना के दो साल बाद •ाी आरोपी खुले आम घूम रहा है और कविता समाज से इतर जिंदगी जी रही है। साल में दो बार कविता की सर्जरी होती है। परिवार से सपोर्ट न मिलने के पर •ाी उसने हार नही मानी। वो समाज में जीने के लिए लगातार सघर्ष कर रही है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

केस 3
अशियाना निवासी 16 वर्षीय रेशम फातमा पर उनके रिश्तेदार ने ही बलात्कार का प्रयास किया। विफल रहने पर आरोपी ने रेशम के चेहरे पर तेजाब फेंक  दिया। हाल में ही रेशम को बेबी बे्रव अवार्ड •ाी दिया जा चुका है।


चुनाव आते ही दिखने लगा दलो का मुस्लिम प्रेम

इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय चुनावो में काफी हद तक निर्णायक भूमिका निभाते  है। चनाव आते ही मुस्लिम हित की बाते करने वाले नेताओं की लाइन लग जाती है लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनका कोई पुरसा हाल नही होता। 2017 में उत्तरप्रदेश के विधानसभ चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए सभी  राजनीतिक दलों ने अपने-अपने तरीके से प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के लगभग  17 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता किसी भी  राजनीतिक दल का भविष्य बनाने या बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाते  आये है। यह बात साफ है कि प्रदेश की 403 में से 100 से अधिक सीटों पर मुस्लिम मतदातों के द्वारा ही हार जीत का निर्णय होता है। हर बार की तरह इस बार भी  चुनाव आते ही सभी  प्रमुख दल सपा, कांग्रेस, बसपा मुस्लिमों को अपनी ओर रिझाने में लग गये है लेकिन इस बार मामला त्रिकोणी नहीं रहा क्योकि मुस्लिम विरोधी कही जाने वाली भाजपा  भी  इस बार मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए जी तोड़ कोशिश में लगी है। फिलहाल अभी  ये कहना जल्दबाजी होगा कि प्रदेश का मुसलमान किसके साथ जायेगा। लेकिन ये बात तय कि इस बार मुसलमान जल्दी किसी के बहकावे में नहीं आने वाला है।
भाजपा  की कोशिश 
मुस्लिम विरोधी चेहरा होने के बावजूद भाजपा  इस बार मुस्लिम समुदाय को अपने साथ लाने में लगी हुई है जबसे केंद्र में भाजपा  सरकार बनी है तबसे लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा मुसलमानों को देश भक्त  बताना और उनको पूरी सुरक्षा देने की बात कहना इस बात की ओर इशारा करता है कि मोदी सबका साथ सबका विकास वाले रास्ते पर चलकर प्रदेश का अगामी विधानसभा  चुनाव लड़ने की तैयारी में है। इसके अलावा केंद्र सरकार के एक साल पूरा होने पर जन जन जक सरकार की उपलब्धियां पहुंचाने के लिए पंपलेटो और बुक को उर्दू में छाप कर मुस्लिम बहुल इलाकों में बांटने के फैसले से विपक्षियों में हलचल मच गई है।

बसपा का भी  जागा मुस्लिम प्रेम
बसपा की बात की जाए, तो बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती मुसलमानों के नाम पर राजनीति तो खूब करती हैं, लेकिन वह सपा प्रमुख की तरह किसी मुस्लिम धर्म गुरु को अहमियत नहीं देती है।वहीं दूसरी तरफ सपा पर मुसलमानों को गुमराह करने का आरोप भी  जड़ देती हैं। बसपा सुपीमों को इस बार ये एहसास हो चला है कि अगामी विधानसभ  चुनाव में उनकी मुकाबला सिर्फ सपा से नहीं बल्कि भाजपा  से भी  होने वाला है यदि ऐसे में मुस्लिम समुदाय का समर्थन उनको नहीं मिला तो उनकी वहीं दुर्दशा हो सकती है जो 2012 के विधान सभा  चुनाव में हुई थी। इस बार  बसपा का इरादा किसी भी  तरह से सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाना है. देखना यह है कि वह अपने इरादों में कितना कामयाब होती है।

सपा भी  जुटी अपना मुस्लिम वोट बैक बचाने में
सपा ने 2012 के विधानसभा  चुनाव घोषणापत्र में 16 खास वादे किये थे तीन साल गुजर जाने के बावजूद उन पर अमल नहीं हुआ। सपा के मुस्लिम समुदाय से किये गये चुनावी वादो में सच्चर समिति, रंगनाथ मिश्र आयोग और निमेष आयोग की सिफारिशों को लागू करना , मुसलमानों को रोजगार देना, आरक्षण देना और पिछड़े मुस्लिम इलाकों में स्कूल खोलना आदि थे। मुस्लिम समुदाय को सुरक्षा देने की भी  बात की गई थी मगर सरकार में हुए संप्रदायिक दंगों ने सपा की छवि पर बट्टा लगाने का काम किया है। इसके बावजूद सपा मुखिया और प्रदेश मुखिया मुस्लिम समुदाय सपा से जोड़कर रखने की कोशिश में लगे हुए है। अभी  हाल में ही उर्दू एकादमी का भी  उदघाटन किया है।

कांग्रेस भी  पीछे नहीं
अजादी के बाद प्रदेश में कांग्रेस का एकछत्र राज हुआ करता था मगर मौजूदा समय में प्रदेश की राजनीति नाम मात्र की रह गई है। पिछल्ले दो दशकों से कांग्रेस का प्रदेश में जनाधार लगातार गिरता ही गया है। उसका अपना वोट बैंक खिसक कर दूसरी पार्टियों में चला गया है । इसबार के लोकसभा  चुनाव के बाद तो प्रदेश में कांग्रेस की और दुर्दशा हो गई है। पार्टी प्रमुख जानते है कि इस बार प्रदेश के विधानसभा  चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा तो ये चुनाव उनके लिए संजीवनी बूटी का काम करेगी। इसी के तहत पार्टी अन्य समुदाय के साथ मुस्लिम समुदाय को भी  जोड़ने में लगी है। सपा सरकार पर दंगे को लेकर हमलावर होना या केंद्र की मोदी सरकार को मुस्लिम विरोधी बताना पार्टी के मुस्लिम वोट बैंक प्रेम को दर्शाता है।

#२०१७ #विधानसभा #चुनाव #उत्तर प्रदेश #कांग्रेस #सपा #भाजपा का मुस्लिम प्रेम

Saturday, 6 June 2015

अब नही भाती गुरुओ की पाठशाला

इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। साल दर साल यूपी बोर्ड के रिजल्ट के प्रतिशत में बढ़ोत्तरी होती जा रही है मगर इसके साथ ही यूपी बोर्ड के हाई स्कूल और इंटरमीडिएट में बच्चों की संख्या भी  कम होती जा रही है। पहले दस साल की अपेक्षा में अब यूपी बोर्ड के स्कूलों से लोगों का मोह भंग  होता जा रहा है। जिसका मुख्य कारण दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में वृद्धि और यूपी बोर्ड के स्कूलों में शिक्षा का गिरता स्तर है।
स्कूलों में वृद्धि छात्रो में गिरावट
यूपी बोर्ड के स्कूलो में लगातार बढोत्तरी हो रही है मगर उसके साथ ही उसमें प्रवेश लेने वालो छात्रो की संख्या में गिरावट हो रही है। मौजूदा समय में राजधानी में यूपी बोर्ड के स्कूलों की संख्या 720 है। पिछल्ले कुछ समय में स्कूलों की संख्या मे तेजी से इजाफा हुआ है। इस बार भी  यूपी बोर्ड की मान्यता लेने में दर्जनों स्कूल लाइन लगाये हुए है। जिस तेजी से यूपी बोर्ड मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से छात्रों की संख्या घट भी  रही है।
दिल्ली बोर्ड के स्कूलों की संख्या बढ़ी
आज से एक दशक पहले तक यूपी बोर्ड के स्कूलों का बोलबाला था फिर राजधानी में दिल्ली बोर्ड के स्कूलों ने दस्तक दी और देखते देखते इन स्कूलों ने अपनी छाप बना ली। इनकी चमक के आगे सरकारी स्कूलों की छवि धूमिल हो गई। एक दशक पहले इन स्कूलों की संख्या दस से पंद्रह थी मगर मौजूदा समय में इन स्कूलों की संख्या 200 से भी  अधिक है।


शिक्षा स्तर में फर्क
यूपी बोर्ड और दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में शिक्षा के स्तर में भी  काफी फर्क है जिसकारण अच्छी शिक्षा ग्रहण करने और अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में अभिभावक  यूपी बोर्ड के स्कूलों के बजाये दिल्ली बोर्ड के स्कूलों को ज्यादा प्रथमिकता दे रहे है। यूपी बोर्ड में थोक के भाव स्कूलों में मान्यता दे दी है। इसके अलावा अगर दोनो बोर्ड के स्कूलो की पढ़ाई में तुलना की जाये तो दिल्ली बोर्ड के स्कूलों की पढ़ाई यूपी बोर्ड की तुलना में ज्यादा हाई टेक है। यूपी बोर्ड के ज्यादातर स्कूलों में आज भी  अंग्रेजी को प्रायामिकता से नहीं पढ़ाया जाता है जबकि दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में जो शिक्षा दी जाती है वो कंपीटिशन लेविल की होती है जिससे बच्चों को शुरु से ही उच्च स्तर की शिक्षा मिलने के कारण वो आगे कंपटिशन में आसानी से आगे निकल जाता है। पढ़ाई के साथ अनुशासन के मामले में •ाी दिल्ली बोर्ड यूपी बोर्ड से काफी आगे है।
वर्जन अभिभावक 
 खुर्रम नगर निवासी आमिर तस्लीम की बेटी शहर के प्रतिष्ठित स्कूल में पड़ती है। यूपी बोर्ड के स्कूूल में एडमिशन न करवा आईएससीई बोर्ड के स्कूल में एडमिशन करवाने के बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अनुशासन शिष्टाचार के चलते यूपी बोर्ड में एडमिशन नहीं दिलवाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में पढ़ाई के साथ अनुशासन भी  सिखाया जाता है जिसके कारण बच्चों शिक्षा के साथ अच्छा व्यवहार भी  सिखने को मिलता है।

2:::: अशियाना निवासी सिराज के दो बेटे है और दोनो ही दिल्ली बोर्ड के स्कूल में पढ़ते है। उन्होने कहा कि प्रतिस्पर्धा के दौर में अच्छी पढ़ाई ही बच्चो का भविष्य तय करती है यदि उनको अच्छी शिक्षा न मिल पाये तो उनका भविष्य भी  अंधकार मय हो जाता है। जहां तक यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ाई का मामला है तो वो अभी  दिल्ली बोर्ड के स्कूलो से काफी दूर है।

स्कूल प्रधानाचार्य का वर्जन
लखनऊ पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य रुपाली पटेल ने बताया कि दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में जो पढ़ाई होती है वो प्रतिस्पर्धा स्तर की होती है जिससे बच्चे आगे जाकर किसी इंजीनियरिंग या किसी और तरह के कंपीटिशन  में भाग  लेते है तो उनको स्कूल में पढ़ाई का काफी फायदा मिलता है। इसके अलावा कहां एडमिशन लेना है कहां नहीं ये अभिभावक  और बच्चों का फैसला होता है । दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में कंपीटिशन बेस पढ़ाई कराई जाती है। अच्छी पढ़ाई केसाथ बच्चों को अनुशासन में रहना •ाी सिखाया जाता है।

2::: खुर्रम नगर गर्ल्स कालेज के प्रधानाचार्य मोहम्मद तारिक के अनुसार यूपी बोर्ड में के ज्यादातर स्कूल हिंदी मीडियम है जबकि आजके समय में अंग्रेजी का अपना अलग महत्व है उसके बिना  अच्छी नौकरी नहीं मिलती है। इसके अलावा मान्यता देने में यूपी बोर्ड सबसे आगे है जिसके कारण हर गल्ली में स्कूल खुल गये है। उन स्कूलों को भी  मान्यता दे दी है जहां पर पढ़ाई ही नहीं होती इससे यूपी बोर्ड के साख पर असर पड़ा है।
वर्जन
वर्तमान समय में दिल्ली बोर्ड के स्कूलों की संख्या में काफी बढ़ोत्तरी हुई है जिसके चलते लोगों के पास विकल्प है। यूपी बोर्ड के स्कूलों में जहां तक शिक्षा के स्तर की बात है वो भी  इतना खराब नहीं है। इस बार के यूपी बोर्ड के रिजल्ट भी  काफी अच्छे गये है। :::::::::: प्रेम चंद बीएस ओ माध्यमिक शिक्षा


#सरकारी #स्कूल #खुर्रम नगर गर्ल्स कोलेज #माद्यमिक शिक्षा 

Friday, 5 June 2015

सीटें कम और छात्र ज्यादा कैसे मिलेगा दाखिला


एक तरफ सरकार सब पढ़े, सब बढ़े का नारा दे रही है और दूसरी तरफ स्नातक में प्रवेश के लिए निर्धारित सीटें ही इतनी कम है कि इंटर की बोर्ड परीक्षा में पास हुए सीबीएसई बोर्ड, यूपी बोर्ड व आईएससीई बोर्ड के छात्रों में से सबको प्रवेश मिलना नामुमकिन है। ऐसे में कई छात्र इस बार प्रवेश पाने में असफल रहेंगे। इसके अतिरिक्त एक तरफ सरकार इंटरमीडिएट में छात्रों को ज्यादा से ज्यादा नंबर देकर पास करने में लगी है मगर स्नातक की सीटों में कोई वृद्वि नहीं हुई है। पिछले तीन चार सालों से इंटरमीडिएट के रिजल्ट प्रतिशत में काफी बढ़ोत्तरी हुई है मगर उस अनुपात में स्नातक की सीटों जैसे बीए, बी कॉम, बीएससी की सीटों में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। हर बार की तरह इस बार भी  कई हजार छात्र प्रवेश पाने में असफल रहेंगे। एलयू व डिग्री कॉलेजों में दाखिले के लिए स्नातक की लगभग 53000 सीटें हैं जबकि राजधानी में ही अकेले यूपी सीबीएसई और आईएससी बोर्ड के ही पास छात्रों की संख्या 66,986 हैं। इसके अलावा गैर जनपद से •ाी लग•ाग बीस से पच्चीस हजार छात्र राजधानी के प्रतिष्ठित कालेजों में प्रवेश पाने को आते हैं इस तरह 53000 सीटों  पर प्रवेश पाने के लिए लग•ाग 90000 छात्र अपनी किस्मत आजमायेंगे। जी-तोड़ मेहनत करके बोर्ड परीक्षा पास करने वाले छात्रों को यदि प्रवेश नहीं मिलेगा तो उसका जिम्मेदार कौन है?सीटें

लखनऊ। यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट का परिणाम आने के बाद धीरे धीरे तीनों बोर्ड के इंटरमीडिएट के रिजल्ट आ चुके हैं। अब छात्र स्नातक में प्रवेश पाने के लिए एक कॉलेज से दूसरे कालेज की भाग  दौड़ में लग गये हैं। मगर इस बीच सबसे बड़ी दुविधा यह है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के साथ डिग्री कॉलेजों में स्नातक की सीटें कम हैं और पास हुए छात्रों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा इस बार मनपसंद कोर्स की सीट पाने के लिए मेरिट की जंग होगी। एलयू व डिग्री कॉलेजों में दाखिले के लिए स्नातक की लगभ ग 53000 सीटें है जबकि राजधानी में ही अकेले यूपी सीबीएसई और आईएससी के ही पास छात्रों की संख्या 66,986 हैं। ऐसे में सीटें कम होने के कारण और पास हुए बच्चों की संख्या के ज्यादा होने के चलते, इस बार कई मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रवेश नहीं मिल पायेगा जिससे उनका साल बर्बाद होने के कारण पढ़ाई भी चौपट होने की पूरी सं•ाावना है। इससे शिक्षा प्रणाली का गैर जिम्मेदाराना रवैया कहें या बच्चों की किस्मत। एक तरफ तो माध्यमिक शिक्षा और बोर्ड में छात्रों को भरपूर नंबर देकर उनको पास कर दिया जाता है मगर वहीं दूसरी तरफ स्नातक की सीटों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं होती है जिससे पास हुए छात्रों और सीटों के बीच का अनुपात साल दर साल बढ़ता जा रहा है।

मेडिकल और इंजीनियरिंग करने वालों को हटा दे तो भी  कम है सीट
स्नातक में दाखिले के लिए होगी जंग 
राजधानी में करीब 66 हजार से अधिक अ•यर्थी स्नातक में दाखिले के लिए आवेदन करेंगे। इसके अलावा गैर जनपद से आने वाले अलग हैं। इसमें से अगर इंजीनियरिंग व मेडिकल में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या करीब 15 हजार हटा भी  दी जाएगी तो भी  स्नातक में दाखिले की जंग रहेगी क्योंकि राजधानी के आसपास के जिलों के करीब 25 हजार स्टूडेंट जिनकी मेरिट अच्छी होगी वह एलयू व कॉलेजों में ही दाखिला लेने आएंगे। ऐसे में इस बार कट आॅफ सूची ऊंची जाएगी।
गैर जनपद से भी  आते हैं छात्र
राजधानी के कालेजों और विश्वविद्यालय में प्रवेश पाने के लिए आसपास के जिले सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, रायबरेली, आजमगढ़, गोंडा बस्ती आदि जगहों से करीब 25 हजार अ•यर्थी यहां दाखिला लेने आते हैं। इंटर में 85 फीसदी से ज्यादा अंक पाने वालों की संख्या 18 हजार से ऊपर है। ऐसे में राजधानी के 66,986 छात्रों की भीड़  में इन छात्रों की भी  भीड़  बढ़ जाती है। राजधानी में इस बार पिछले साल के मुकाबले इंटरमीडिएट का रिजल्ट काफी अच्छा गया है। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट की अगर बात की जाए तो यहां पर 50475 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे और इसमें से 45,929 छात्र सफल हुए। इनमें से लग•ाग 13 हजार छात्र ऐसे हंै जो 75 फीसदी से ऊपर अंक पाए हैं। 85 प्रतिशत से ऊपर नंबर पाने वाले करीब 9 हजार स्टूडेंट हैं। वहीं दूसरी ओर आईएससी (12 वीं) में 11,776 स्टूडेंट पास हुए हैं और यहां पर 85 प्रतिशत से ऊपर नंबर पाने वाले करीब 5 हजार स्टूडेंट हैं। इसी तरह सीबीएसई बोर्ड में 9281 अ•यर्थी पास हुए हैं और इसमें लगभाग  4000 छात्र ऐसे हैं जिनके 85 प्रतिशत से ज्यादा नंबर आए हैं।
शहर के प्रमुख कालेजों में प्रवेश के लिए हो रही मारामारी
लखनऊ विश्वविद्यालय, नेशनल पीजी कॉलेज, आईटी पीजी कॉलेज, अवध गर्ल्स कॉलेज, क्रिश्चियन कॉलेज, केकेसी, नवयुग कन्या पीजी कॉलेज आदि में इस बार दाखिले के लिए अ•यर्थियों में होड़ मचेगी। एलयू में कुल 3277 सीटें स्नातक में हैं जबकि डिग्री कॉलेजों में लगभाग  5300 सीटें हैं। ऐसे में कई छात्रों को इस बार प्रवेश नहीं मिल पायेगा।
सरकारी व विश्वविद्यालय संबधित कॉलेजों में सीटें
कॉलेज                       बी.ए                 बीकॉम             बीएससी
आईटी पीजी कॉलेज          580                   240              420
शिया पीजी कॉलेज            1046                 1020           670
शशि •ाूषण गर्ल्स पीजी कॉलेज   500                     -                   -
विद्यांत हिंदू पीजी कॉलेज          670                    320                -
अमीरुददौला इस्लामिया कॉलेज   280                   280             240
पंडित दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज  420                    80               100
नेताजी सु•ााष चंद्र बोस कॉलेज      410                   100              100
महाराजा बिजली पासी किला कॉलेज   240                    60               60
महामाया डिग्री कॉलेज                   420                    -                  -
अवध गर्ल्स कॉलेज                       400                  240              -
बीएसएनवी कॉलेज                    700                   240             700
डीएवी कॉलेज                         500                   -                 385
केकेसी                                 1080                 1080          840
करामत गर्ल्स कॉलेज                  1075                  60              180
कालीचरण पीजी कॉलेज                 500                   120             -
खुनखुनजी गर्ल्स कॉलेज                  385                   -                 -
क्रिश्चियन पीजी कॉलेज                460                    440            700
महिला पीजी कॉलेज                   960                      160           630
मुमताज पीजी कॉलेज                  650                     60             240
एपीसेन मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज         475                     80               -
कृष्णा देवी गर्ल्स कॉलेज               475                     -                   -
नारी शिक्षा निकेतन गर्ल्स कॉलेज      560                     80              100
नवयुग कन्या पीजी कॉलेज           700                    240            190
नेशनल पीजी कॉलेज                  440                   560             300
कुल                                13886                   5460           5855

इंटरमीडिएट में किस बोर्ड में कितने हुए पास
यूपी बोर्ड- 45929 हजार
आईएससी-11776 हजार
सीबीएसई -9281 हजार

एलयू में स्नातक की सीटें
बीए            1410
बीए आॅनर्स     60
बीकॉम           800
बीकॉम आॅनर्स      100
बीएससी मैथ्स        507
बीएससी बॉयो        280
एलएलबी आॅनर्स     120
कुल सीटें             3277

बीते साल एलयू की कटआॅफ सूची
कोर्स कट आॅफ (अधिकतम से न्यूनतम) प्रतिशत
बीएससी मैथ्स 94.688 से 90
बीएससी बॉयो 91.96 से 86.268
बीकॉम 91.163 से 85.742
बीकाम आॅनर्स 92.569 से 84.503
बीए 91.403 से 65


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ज़िन्दगी की ज़रूरत हो सकती है जानलेवा

इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। शहर में जैसे जैसे गर्मी का पारा बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे पीने के पानी की अहमियत बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा पीने के पानी की दिक्कत राहगीरों और सड़क पर दौड़ते वाहन चालकों  को होती है। ऐसे में ठंडे पानी की मांग ज्यादा बढ़ जाती है। हर कोई बिसलेरी नहीं खरीद सकता इसलिए लोग पानी के पाउच खरीदते है। इन पानी के पाउच से प्यास तो बुझ जाती है मगर साथ ही कई बीमारियां भी  होने का खतरा बढ़ जाता है। शहर में खुलेआम पाउच के पानी की बिक्री हो रही है जबकि जिम्मेदार विभाग  आंखों पर पटटी बंधे बैठा है। गर्मी के मौसम में ये एक कारोबार के रुप में सामने आता है। जिसका बड़े पैमाने पर काम होता है। इस काम में बड़ो से लेकर बच्चे तक स•ाी लिप्त पाये जाते है।

 बस स्टैंड और चौराहे है मुख्य जगह
शहर के कई इलाकों सहित मुख्य  रूप से बस स्टैंड पर पानी का कारोबार चरम पर है। यहां पर निचले  स्तर की पॉलीथीन में दूषित पानी को भरकर बसों पर ओर चौराहों पर बेचा जा रहा है। गर्मी में गला सूखने और अपनी प्यास को बुझाने के लिए लोगों को मजबूरन इन पानी के पाउच को लेना पड़ता है। विशेषकर यात्री इन्हीं पालीथीन में भरे   दूषित पानी से को पी रहे है। शहर के बस स्टैंड पर हाथों में पाउच लिए आवाज लगाकर पानी बेचते बच्चे आसानी से देखे जा सकते हैं। लोग भी  मजबूरन इन्हें खरीदते हैं। पाउचों में भरा हुआ यह पानी अपेक्षाकृत साफ नहीं होता है। इन्हें आस पास के किसी भी  पानी के स्रोत से छोटी छोटी पॉलीथिनों में भर  लिया जाता है। उसके बाद बर्फ में ठंडा कर बच्चों को बेचने के लिए पकड़ा दिया जाता है। जहां बस स्टैंड पर गुजरने वाली बसों में और यात्रियों को अमूमन 2 रुपए में बेचते हैं।

स्वास्थ्य के  लिए घातक है दूषित जल
गर्मी में बेहाल लोगों के लिए पानी किसी अमृत से कम नहीं है। गर्मियों के मौसम में शुद्ध पेयजल स्वास्थ्य को ठीक रखने का सबसे अच्छा तरीका  है। लेकिन शहर में खुलेआम बि रहे इन पाउचों में भरा  हुआ दूषित पानी स्वास्थ्य के लिए काफी  नुकसान देह हैै। विशेषज्ञों की मानें तो पाउचों में जो पानी •ारा  होता है वो अमानक स्तर का होता है। जिसके कारण लोगों को पेट संबंधी रोगों और समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की तादाद में एक बड़ा हिस्सा दूषित पानी का सेवन करने वाले लोगों का होता है। चिकित्सकों के अनुसार गर्मी के मौसम में अधिक से अधिक शुद्ध पानी पीना चाहिए। साथ ही दूषित सामग्री के सेवन से भी  बचना चाहिए।
दूषित पानी पीने से इंसान को कई तरह की बीमारियां हो सकती है। शहर में खुले आम धड़ल्ले से पन्नी के पानी में कई तरह की बीमारियों को बेचा रहा है। दूषित पानी पीने से कई तरह की जानलेवा बीमारियां होती है जिनमें पीलिया, डायरिया, टाइफाइड आदि प्रमुख है। इसके अलावा त्वचा रोग, नेत्र रोग, पेट की तमाम बहुत सी गंभीर  बीमारियां होती है।

दस पैसे की पन्नी में बेचते है बीमारी

पान की गुमटी, परचून की दुकानों, और ढेलों पर 10 पैसे की पन्नी में आस पास के नल से सादा पानी •ारकर उसको बर्फ में लगाकर ठंडा करके बेचने का धंधा जोरो पर चल रहा है। इन पाउचों को एक रुपए से लेकर दो रुपए तक प्रति पाउच की दर से बेचा जा रहा है। इसके बावजूद स्वास्थ्य वि•ााग मूकदर्शक बना हुआ है।  इस तरह के दूषित पाउचों की बिक्री का कारबारों चरम पर पहुंच चुका है. जिस पर अंकुश लगाने वाला कोई •ाी नहीं है।
फायदा ही फायदा
पन्नियों में दूषित पानी को भरकर सड़क और बस स्टाप पर बेचने वालों के लिए ये एक ऐसा धंधा है जिसमें केवल फायदा ही फायदा है। इस गोरखधंधे लागत भी  नहीं आती लेकिन फायदा जमकर होता है। एक पानी के पाउच की कीमत दो रुपये से लेकर पांच रुपये तक हो सकती है। जिसमे लागत मात्र पैसों में आती है क्योकि ये लोग शहर में ही लगे पानी के पंप या सरकारी हैंडपंप से ही पानी को •ारते है और बर्फ में लगाकर उसको मनमाने दाम पर बेच देते है। दुकानदार गर्मी के तीखे तेवरों और प्रशासन के ढीले पड़े रवैये से पैसा बनाकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं।

ये है नियम
पानी बेचने के लिए फर्म का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है इसके अलावा आईएसओ से प्रमाणित होना भी  अनिवार्य है। पीने योग्य पानी बेचने के लिए उसका प्यूरीफाइड होना भी  जरुरी है। साथ ही पानी के पाऊच पर उसकी एक्सपाइरी डेट का भी  होना जरुरी है।

वर्जन
शहर में बिक रहे पानी के अनधिकृत पाउच पर नगर निगम और फूड डिपार्टमेंट कार्रवाई करता है। इस तरह के पाउच से पेट की कई बीमारियां होती है। जिसमें पीलिया, डायरिया और हेपेटाइटिस मुख्य है। इसके अलावा दूषित पानी के सावन से कई जल जनित बीमारियां होती है।:::::::डॉ. अशुतोष दुबे चिकित्सा अधीक्षक सिविल अस्पताल

2:::: जो लोग  मानकों के विपरीत पानी बेच रहे है उनके खिलाफ अ•िायान चलाकर कार्रवाई की जाती है जो लोग पानी को विपरीत मानकों के विरुद्व बेच रहे है उनके विरुद्व मुकदमा दर्ज करवाया जाता है। सिटी मजिस्ट्रेट एस एन यादव

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