Monday, 18 November 2019

नोट बंदी ने दिला दिया बराबरी का हक

3 साल पहले मेरी ज़िंदगी मे खुशी का एक पल भी नही था। कोई भी ऐसा नही था जिससे मैं अपने दिल की बात कह सकूं। दोस्त यार मेरा मजाक उड़ाते थे। यहां तक अगर मैं अकेले कही जाता था तो लोग मुझे देख कर सकते थे। मॉल, पार्क तो मैंने जाना ही बंद कर दिया। यहां तक घरेलू फंक्शन में भी जाने से बचता था। मैं खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगा था मेरा जीवन कोरे कागज से भी ज्यादा सफेद था। उदासी भरी जिंदगी जीने को मजबूर था। फिर #8novembre को रात 8 बजे से मेरी जिंदगी ही बदल गई। वीरान पड़े मेरे दिल में खुशियों के फूल खिल गए। ज़िन्दगी का हर पन्ना ब्लैक एंड वाइट से कलर फुल हो गया था। क्योकि मेरी लाइफ में पहली बार कोई #बन्दी आई थी जिसका नाम #नोटबंदी था। उसके आते ही मेरी ज़िंदगी बदल गई कैसे आपको बताते है-
1- जो पहले ज्यादा खुश थे उनकी खुशी कम हो कर मेरे बराबर आ गई ।
2-जो पहले मुझे देख कर हंसते थे वो सब लोग लोगों के चेहरे की रंगत बदल गई। अब वो खुद पर हँसने लायक नही रहे।
3- जो मेरी बेरोजगारी का मजाक उड़ाते थे अब वो खुद बेरोजगार हो गए।
4- जो मुझे चिढ़ाने के लिए अपनी गर्ल फ्रेंड के गले मे हाथ डाल कर उनको शॉपिंग करवाने ले जाते थे। आज वो उनको आइसक्रीम भी नही खिला पा रहे है।
5- मेरे सांवलेपन का मजाक बनाने वाले बैंक और एटीएम की लाइन में लग कर खुद सांवले ही नही काले हो गए है।
6- जो कभी मेरे साथ चाय की टापरी पर चाय नही पीते थे आज वो मुझे फोन करके खुद बुलाते है (क्योकि चाय के 15 रुपये मैं ही देता हूँ)
7- जो कभी मेरे साथ बैठना गवारा नही करते थे आज 24 घंटे में 18 घंटे मेरे साथ ही रहते है (क्योकि उन सबकी नोटबन्दी में नौकरी चली गई)
मेरी जिंदगी के भले ही चढ़ाव न आया हो लेकिन मोदी जी ने #नोटबन्दी कर के बाकी सबकी जिंदगी में उतार जरूर ला दिया। इसलिए वो सब मेरे बराबर आ गए। यह सब #मोदी जी की वजह से हो पाया। #सबक_साथ_सबका_विकास थैंक यू मोदी जी।

बस स्टॉप से शुरु हुआ मेरा प्रेम सफर


घर से पहली बार मैं बाहर पढ़ाई के सिलसिले में निकला था। रोज सुबह आठ बजे उठना और नौ बजे की बस पकड़कर कॉलेज जाना। शाम को कॉलेज से छूटते ही फिर से बस पकड़कर घर आ जाना। करीब साल भर से यहीं मेरी जिंदगी थी। बस स्टॉप, कॉलेज, घर, पढ़ाई और सोना। यह चार चीजों के अलावा मेरी जिंदगी में कुछ न था। ऐसी जिंदगी वो भी बाहर घर से बाहर रहते हुए लोगों को हैरान करने वाली है।लेकिन मेरी ज़िंदगी के पल ऐसे ही गुजर रहे थे। दोस्त यार तो थे लेकिन बहुत ही कम, नया शहर नए लोग नया माहौल में मैं खुद को ढालने की कोशिश कर रहा था। रोज की ज़िंदगी की तरह उस दिन भी मैं बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रहा था लेकिन मुझे क्या पता था कि यह बस स्टॉप पर ही मेरी जिंदगी प्यार, खुशी के इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर होगी। कान में इयर फोन लगाए मैं मोबाइल में गाने सुन रहा था। तभी मुझे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ। मैंने पलटकर देखा तो बहुत ही खूबसूरत सी सफेद ड्रेस और गुस्से से लाल लड़की मुझसे कुछ कह रही थी मैंने फौरन अपने इयरफोन निकाले और बोला जी बताएं। उसने कहा.... बताएं वताएं नहीं आप के पैर के नीचे मेरा टुपट्टा दबा हुआ हुआ। मैं अपना पैर हटाते हुए बोला सॉरी पता नहीं चला। वह बोली पता कैसे चलता कान में तो
फोटो स्त्रोत- इंटरनेट 
इयरफोन लगाए रखे हुए हो। वह गुस्से में मुझे बातें सुनाती जा रही थी। आस पास खड़े लोग मुझे देख रहे थे। किसी के लिए भी पब्लिक प्लेस में यह मोमेंट बहुत ही ऑकवर्ड होता है लेकिन मुझे इसका फर्क ही नही पड़ा।मैं उसको देखे जा रहा था। इतने मैं बस आ गई और वह बस में बैठ गई। मैं भी उस बस में सवार हो गया। रास्ते भर उसको देखता रहा। कॉलेज पहुंचने के बाद भी पूरे दिन मेरे दिमाग में उसकी ही सूरत घूमती रही। रात भर मैं उसके खयालों में खोया रहा। आंखों से नींद गायब थी बस इंतजार था सुबह का। पहली बार मैं किसी को देखने को बेताब था। बार बार नजरें घड़ी की तरफ जाती। दिल में एक अजीब से बैचेनी थी। किसी तरह सुबह हो ताकि मैं उससे मिल सकूं। उस दिन मैं जल्दी ही उठ गया और जल्दी ही बस स्टॉप पहुंचकर उसका इंतजार करने लगा। एक एक मिनट घंटों के बराबर लग रहा था। चारों तरफ नजरें उसको ही तलाश कर रही थी लेकिन वो नज़र ही नही आ रही थी जैसे जैसे बस का समय होता जा रहा था मेरी बेताबी बढ़ती जा रही थी तभी एकाएक वह नजर आई। उस दिन वह ब्लैक ड्रेस में थी, उसके खुले हुए बाल मुझे आसमान में छाए काले बादलों की तरह नजर आ रहे थे। उसके गले का लॉकेट ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने चांद को कैद कर लिया हो। मेरे तरफ आते उसके कदमों की आहट मेरे दिल की धड़कनों का बढ़ा रहा थी, तभी उसकी नजरें जैसे ही मुझसे मिली मैंने मुस्कुराते हुए उसको हॉय किया। लेकिन उसने बिना जवाब दिए मुंह मोड़ लिया। उसका जवाब न देना मुझे जरा भी बुरा न लगा। बस उसको देख कर ही दिल को सुकून आ गया था। मैं रोज़ उसका बस स्टॉप पहुँच कर उसका इंतजार करता और जब वो आती तो मैं उसको कभी इशारों में कभी मुस्कुरा कर हॉय बोलता लेकिन वो जवाब नही देती। करीब पंद्रह दिन तक ऐसे ही सिलसिला चलता रहा। वह मुझे देखती और मैं उसको हाथ उठाकर हॉय बोलता। फिर एक दिन मैने उसको हॉय बोला तो उसने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया।मेरे लिए जिंदगी का वह पल सबसे खास था। फिर कई दिनों तक बस इशारों इशारों में ही बात होती रही। एक दिन किस्मत ने भी साथ दिया बस काफी भरी हुई थी। बाकी लोग बस में चढ़ गए बस मैं और वो नही चढ़ पाए। बस स्टॉप पूरा खाली हो चुका था मैं हिम्मत करके उसके पास गया और पहली बार उससे बात की। वही नॉर्मल कहाँ पढ़ती हो, घर कहाँ है कौन सा कोर्स कर रही हो मैं एक के बाद एक सवाल करता जा रहा था तभी वो बोली इंटरव्यू ले रहे हो क्या मेरा। मैने भी पलट के बोल दिया चाहो तो तुम भी ले लो मेरा इंटरव्यू। मेरे कहते ही वो हँसते हुए बोली जब जरूरी समझूंगी तो इंटरव्यू भी ले लूंगी। फिर हम दोनों में बात होने लगी और बस आ गई। फिर कई महीनों तक हम दोनों बस स्टॉप पर ही मिलते रहे। करीब 6 महीने बाद हम दोनों ने अपना नम्बर एक्सचेंज किया। उसके बाद तो भाई साहब वक़्त कम पड़ जाता था लेकिन हमारी बातें खत्म ही नही होती थी। कॉलेज का लास्ट इयर था इसके बाद मुझे शहर छोड़ के वापस घर आना होगा या किसी और शहर में जॉब के लिए जाना होगा। उस आने वाले पल को मैं सोच कर ही डर जाता हूँ। जब भी उसको बताता हूँ तो वो मेरा हाथ पकड़ के कहती है कभी कभी लंबे सफर में साथ चलने के लिए थोड़े वक़्त के लिए बिछड़ना जरूरी होता है। यह बहुत छोटा वक़्त होगा यकीन मानो ....... आखिर वो वक़्त भी आ गया कॉलेज पूरा हुआ और सब अपने घर जाने लगे उसके साथ जैसे वक़्त का पता ही नही चला कब दो साल गुजर गए। रात के करीब 8 बज रहे थे 1 30 बजे की मेरी ट्रैन थी मैं उससे बात करते करते अपना सामान पैक कर रहा था तभी वो बोली मुझे तुमसे मिलना है अभी क्योकि रात में 1 30 बजे तुम चले जाओगे फिर पता नही कब मिलोगे। या मिलने आओगे भी या नही। मैंने कहा पगला गई हो क्या अभी तो 1 घंटा पहले ही तो तुम्हारे साथ था और यह तुम कैसी बातें कर रही हो। उसने कहा मुझे कुछ नही सुन्ना मुझे मिलना है बस। पंद्रह मिनट में वही मिलो जहां पहली बार मिले थे। यह कहते ही उसने फोन रख दिया । उसको छोड़ के जाने का दिल तो मेरा भी नही था। मैं पंद्रह मिनट बाद बस स्टॉप पर पहुँच गया। वो वहां पहले से खड़ी थी मुझे देखते ही उसने गले लगा लिया। कुछ देर बाद गले से हाथ निकलते हुए उसने मुझे एक गिफ्ट दिया। और बोली जब ट्रेन में बैठ जाना तब खोलना। फिर वो चली गई। जब मैं ट्रैन में बैठा तो उसका गिफ्ट खोल के देखा उसको देख कर मैं हैरान रह गया। असल में एक फोटो फ्रेम करवा कर दी थी जो हमारी पहली मुलाकात का थी याद आया नही न अरे उसी दिन की जब उसका दुपट्टा मेरे पैरों के नीचे दब गया था तस्वीर में वो मुझ पर चिल्ला रही थी और मैं उसको देख रहा था। उसके बाद मैंने उसको फोन किया। और बोला यह फ़ोटो तुम्हारे पास कैसे आई किसने क्लिक की तो उसने बस इतना ही कहा कि मेरे पास तो शुरू से एक्टिवा थी मैं कॉलेज भी उसी से जाती थी 2 साल पहले खराब हो गई थी इसलिए मुझे बस से जाना पड़ा कुछ दिन पांच दिन बाद सही भी हो गई थी और हां तुम यह मत समझना की तुम ही मुझसे मिलने बस स्टॉप र आते थे। ...... बस स्टॉप से शुरू हुई कहानी आज भी बदस्तूर जारी है।

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  • #प्रेमकहानी #लवस्टोरी #कॉलेज 

अंधेरी रात में जला मेरे दिल का बल्ब

फोटो स्त्रोत- इंटरनेट 
रात के दो बजे मैंने अपने दोस्त की चादर खींचते हुए उससे कहा, चलो यार चाय पीने चलते हैं। दोस्त खींजते हुए बोला, मैं आज नहीं जाऊंगा। तुमको जाना हो तो जाओ और वो फिर से चादर ओढ़कर सो गया। थोड़ी देर बाद मैं अकेले ही हॉस्टल से चला गया। अक्सर दोस्तों के साथ रात में बाहर की टपरी पर बैठकी हुआ करती थी। मेरे पहुंचते ही चाय वाला भी बोला, ‘भइया आज अकेले/’ मैंने कहा कि भइया तुम बस चाय पिला दो तो बस क्योंकि तुम्हारी चाय पीये बगैर नींद नहीं आती।’ मैं बाहर बेंच पर बैठकर चाय का इंतजार करने लगा। 
तभी एक लड़की ब्लैक ड्रेस में स्कूटी खींचते हुए चली आ रही थी। वो पास आकर बोली, एक्सक्यूज मी! मेरी गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही है। क्या आप मेरी हेल्प कर सकते हैं/ हर किसी की नजर उसको ही देख रही थी। मैंने उससे स्कूटी ली और स्टार्ट करने की कोशिश करने लगा। मैंने कहा, ‘शायद इसका प्लग खराब है इसलिए स्टार्ट नहीं हो रही है।’ वह बोली, अब मैं क्या करूंगी/ उसकी आवाज में बैचेनी और घबराहट थी। रात की वजह से वह डर रही थी। मैंने उसको हिम्मत देते हुए कहा कि परेशान ना हो। मैं प्लग साफ करके देखता हूं। शायद काम कर जाए। मैं प्लग निकाल कर देखने लगा। तभी वो बोली बर्थ डे पार्टी में गई थी, काफी देर हो गई। दो घंटे से परेशान हूं। अब तो हॉस्टल में भी एंट्री नहीं मिलेगी। मैंने मुस्कुराकर कहा कोई नहीं। ढाई बज ही रहे हैं, थोड़ी देर में सुबह हो जाएगी। फिर चली जाना। उसने कहा, तब तक मैं यहीं खड़ी रहूं/ देखो सब लड़के कैसे देख रहे हैं। उसकी आंखों में थोड़ा गुस्सा और आवाज में बैचेनी थी। मैंने उसे ढांढस बांधते हुए कहा कि घबराओ नहीं। मेरे होते हुए तुम्हें कोई कुछ नहीं करेगा। वो बोली तो फिर तुम सुबह तक मेरे साथ यहीं रूकोगे/ मैंने हंसते हुए कहा कि अरे भाई! मुझे सुबह तक में दो-तीन चाय पीनी है। फिर सुबह का नाश्ता करके ही हॉस्टल वापस जाना है। मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई और वहीं बेंच पर हम दोनों बैठ गए। उसके बाद चाय का दौर चलता रहा और हमारी बातें भी चलती रहीं। सुबह हुई और इत्तेफाक से प्लग लगाते ही गाड़ी भी स्टार्ट हो गई। फिर वो चली गई। उसके बाद से हमारी मुलाकातों का सिलसिला जारी है। आज भी जब चाय की टपरी पर हम दोनों बैठते हैं तो अपना वो पहला दिन जरूर याद करते हैं।  


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Tuesday, 4 August 2015

सत्ता के पावॅर और सियासत की शिकार होती महिलाए


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। सारा मर्डर मिस्ट्री ने एक बार फिर सफेदपोश सियासत करने वालों की नियत पर सवाल खड़ा कर दिया है। अमनमणि अपने पिता अमरमणि के नक्शे कदम पर चलते हुए दिखाई दे रहे है। सत्ता और प्यार के बीच पनापती राजनैतिक महत्वाकांक्षा ने कई लडकियों की जिंदगियां बर्बाद कर दी है तो कई की जिंदगी ही छीन ली है। पहले प्यार फिर राजनीति फिर सत्ता में कुर्सी की चाहत में न जाने कितनी मासूम लडकियों का दुखद अंत हो गया। सेक्स और सियासत का यह •ाी एक रूप है। चांद-फिजा, अमरमणि और मधुमिता, आनंद सेन और शशि, दद्दू प्रसाद और कमला,  ये सारे संबंध क•ाी •ाी जोर जबरजस्ती से नहीं बनाए गए। लेकिन जब यही संबध में अपने हक की आवाज उठाई गई तो अपने रसूख से उनकी बेरहमी से हत्या करवा दी ।

मधुमिता और अमरमणि: मधुमिता एक कवयित्री थी। अतिमहत्वकांक्षा ने अमरमणि के करीब लाया। उस समय यूपी के मंत्री अमरमणि से उनका प्यार परवान चढ़ गया। दोनों गुपचुप मिलने लगे। यह बात मंत्री की पत्नी को रास नहीं आई। उनकी पत्नी और अमरमणि पर मधुमिता की हत्या 2003 में कराने का आरोप है। फिलहाल, अमरमणि जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मधुमिता हत्या किए जाने वक्त गर्•ावती थी।
आनंद सेन और शशि: यूपी के फैजाबाद की रहने वाली शशि लॉ की स्टूडेंट थी। शशि आनंद सेन के काफी करीब हो गई थी। वह राजनीति में आना चाहती थी। इसलिए ं उसने आनंद सेन को चुना। शशि के पिता खुद एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे। आनंद सेन ने •ाी उसकी आंखों में बसे इस ख्बाव को देख लिया था। फिर शुरू हुआ वायदों का दौर। वायदे बढ़ते गए, जिस्मानी दूरियां मिटती गईं। 22 अक्टूबर 2007 को शशि अचानक गायब हो गई। लंबी छानबीन के बाद पता चला कि वह इस दुनिया से जा चुकी है। उसकी हत्या की जा चुकी है।
दद्दू प्रसाद और अंगद सिंह: दद्दू प्रसाद और उनके पीए अंगद सिंह पर रेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाने वाली महिला ने एक बेटे को जन्म दिया है। महिला का दावा है कि दद्दू प्रसाद और उनके पीए में से कोई एक उसके बच्चे का पिता है। कई महीने पहले कमला ने यह आरोप लगाकर यूपी की राजनीति में •ाूचाल ला दिया था कि दद्दू प्रसाद लंबे समय तक उसका रेप करते रहे, जिससे वह प्रेग्नेंट हो गई। चित्रकूट जिले के बरगढ़ गांव की रहने वाली कमला गरीबी से तंग आकर और नौकरी की चाहत में बसपा नेता दद्दू प्रसाद के करीब आ गई थी। नौकरी दिलाने का झांसा देकर दददू प्रसाद ने उसका यौन शोषण किया।

पुरुपोत्तम और शीलू: बांदा के बसपा विधायक पुरुषोत्तम दिवेद्वी पर रेप का आरोप लगा जिसमें उनको कोर्ट ने सजा •ाी सुना दी है। गौरतलब है कि पीड़ित लड़की ने पूर्व विधायक और उनके साथियों पर दिसंबर 2010 में बंधक बनाकर बलात्कार करने का आरोप लगाया था। ये आरोप लगाने के बाद लड़की को पूर्व विधायक के घर में चोरी करने के आरोप में जेल •िाजवा दिया गया था। मीडिया में इसकी चर्चा जोर पकडने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुरुषोत्तम द्विवेदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और इस मामले की सीबीसीआईडी से जांच के आदेश दिये थे।

धनंजय सिंह पर महिला ने लगाया था रेप का आरोप
बाहुबली सांसद धनंजय सिंह पर •ाी एक महिला ने बंदूक की नोक पर रेप करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद धनंजय सिंह पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित महिला का आरोप था कि धनंजय ने 2005 में उसके साथ बलात्कार किया और धमकी दी कि अगर इस बारे में किसी को बताया तो उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
#महिला सुरक्षा #धनजय सिंह #सत्ता #पावर 

Wednesday, 29 July 2015

कार्पोरेट कल्चर के तर्ज पर सपा कर रही है प्रत्याशियों का चयन



इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। कार्पोरेट जगत की तर्ज पर सपा इस बार प्रत्याशियों का चयन कर रही है जिसमें इंटरव्यू, पदाधिकारियों से प्रत्यशियों का बायोडाटा इकठठा करवाना, राजनैतिक व समाजिक स्तर पर क्षेत्र में पकड़ आदि बातो पर जोर दिया जा रहा है इंटरव्यू के जरिये पार्टी इस बार सही प्रत्याशियों की तलाश में लगी है। 2012 के विधानसभ चुनाव में 169 सीटों पर मिली हार पर सपा 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत की जुगात लगा रही है। पार्टी के सामने 2012 के विधानसभा  चुनाव में जीती गई सीटों को बचाने का भी  दबाव है  तो  साथ ही इन हारी हुई सीटों पर अपना झंडा भी  लहराने का मंसूबा है। विपक्षिय दल जैसे भाजपा बसपा कांग्रेस ने अगामी विधानसभ  की तैयारियो का बिगुल फूं क दिया ऐसे में सत्तारुढ़ पार्टी ने नहले पर दहला मारते हुए अपनी तैयारियां भी  शुरु कर दी है। सपा पिछल्ली बार की उन सीटों की समीक्षा कर रही है जिस पर उसको हार मिली थी। इस बार सपा ने उन सीटो पर प्रत्याशियों के चयन के कार्पोरेट का कल्चर अपनाया है जिसमें पिछली बार हारी हुई सीटो की समीक्षा के साथ उन सीटों से लड़ने वाले प्रत्याशियों का कार्पोरेट कल्चर की जर्त पर इंटरव्यू लेना शुरु कर दिया है।

अच्छे प्रत्याशी की तलाश का नया तरीका
2012 के विधानसभा  चुनाव में सपा की जबरदस्त लहर के बावजूद वो 169 सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा था।  मिशन 2017 में सपा अपनी इन्ही सीटो को अपनी मजबूती बनाने में लगी हुई है। इसके लिए उसने उन क्षेत्रों से लड़ने वाले प्रत्याशियों का इंटरव्यू लेना भी  शुरु कर दिया है। सपा इस बार ऐसे प्रत्याशी की तलाश कर रही है जो क्षेत्र से पूरी तरह वाकिफ हो और जातीय समीकरण में फिट बैठता हो। झांसी कानपुर अलीगढ़ आगरा आदि जगहो के मंडल के 169 सीटों के लिए अब तक 1500  आवेदन आ चुके है। सबको टिकट देना मुमकिन नहीं है इसलिए सपा इंटरव्यू के जरिये उनकी क्षमता परख रही है इससे पहले ऐ सिर्फ कार्पोरेट जगत में होता थ मगर इसबार सपा ने इसको अपना कर राजनीति में नई दिशा देने की कोशिश की है। इसके जरिये सही प्रत्याशी का चयन •ाी हो जायेगा और पार्टी में मनमुटाव की स्थिति •ाी कम होगी।

इंटरव्यू के जरिये राजनीतिक औेर समाजिक स्थिति का लगायेगें अंदाजा
जैसे कार्पोरेट पर जगत में प्रतिभागी की प्रतिभा  और उसके काम  का अंदाजा इंटरव्यू के जरिये किया जाता है ठीक उसी तरह सपा ने भी  अगामी विधानसभा  चुनाव के लिए अपनी पिछल्ली बार की हारी हुई सीटों पर प्रत्शशियों का चयन इसी तरह करना शुरु कर दिया है जिसमें चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशियों का इंटरव्यू लिया जा रहा है जिसमें सपा इन इंटरव्यू के जरिये प्रत्याशियों के राजनैतिक और समाजिक स्तर की समझ और महत्वाकांक्षा को समझेगी। इसके लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक टीम •ाी गठित कर दी है जो प्रत्याशियों के इंटरव्यू का रिपोर्ट कार्ड मुख्यमंत्री को देगी।

इंटरव्यू लेने वालों के पैनल में ये है शामिल
वर्ष 2012 के चुनाव में हारी169 सीटों पर वर्ष 2017 के लिए अ•ाी से प्रत्याशी चयनित करने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कमेटी गठित की है। इसमें मंत्री शाहिद मंजूर, कैलाश यादव, राज्यमंत्री एवं महासचिव अरविंद कुमार सिंह गोप, कमाल अख्तर, एमएलसी व प्रदेश सचिव एसआरएस यादव, एमएलसी नरेश उत्तम शामिल हैं। लेकिन टिकट पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ही करेंगे, लेकिन इसमें चयन समिति सिफारिशों की महत्वपूर्ण •ाूमिका होगी।

राजधानी में बढ़ते अपराधो के आगे बेबस पुलिस


इन्टरवल एकसप्रेस
लखनऊ। राजधानी में बीते साल से लेकर अब अपराधिक ग्राफ तेजी से बढ़ा है। दिन दहाडे एक के बाद एक दिल दहला देने वाली घटनाओं ने राजधानी के अमन चैन को बर्बाद कर दिया। अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस का हर दांव बे असर साबित हो रहा है। पूर्व एसएसपी यशस्वी यादव के बाद अपराधो पर अंकुश लगाने के लिए आये नए एसएसपी राजेश पांडेय को •ाी अपराधो ने संभलने का मौका नहीं दिया। खुलेआम गोलियों की तड़तड़ाहट से बदमाशों ने शहर में ऐसी दहशत फैलाई कि लोग अब अपने को सुरक्षित महसूस नही कर पा रहे है। जहां एक तरफ खुलेआम बदमाश व अपराधी पुलिस को चुनौती दे रहे है वहीं दूसरी तरफ पुलिस किसी भी  सनसनीखेज कांड का खुलासा नहीं कर पा रही है।
एक महीने में बढ़ी अपराधिक घटनाएं
लगभग  एक महीने में राजधानी में अपराधिक घटनाओ में काफी तेजी आई है। पिछल्ले एक महीने में सात महिलाओं और तीन प्रॉपर्टी डीलरों सहित 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा सात महिलाओं से दुराचार, नौ सनसनीखेज लूट, 12 चोरियां समेत दस घटनाएं छेड़छाड़ की हुई है। जिसमें पुलिस सिर्फ 15 घटनाओं का ही खुलासा कर सकी है। यह तो वह मामले है जो मीडिया की नजर में है ऐसे कितने मामले होगें जो राजधानी पुलिस ने हजम कर लिया होगा । हालांकि पुलिस की टीमें एक वारदात की पड़ताल में जुटती हैं तब तक दूसरा दुस्साहसिक कांड हो जाता है।

चुनौतीपूर्ण वारदातों का खुलासा करने में पीछे पुलिस
शहर में हुईर्  चुनौतीपूर्ण वारदातों का खुलासा करना तो दूर की बात पुलिस उन घटनाओं का सिरा तक नहीं तलाश सकी है। फिर चाहे वो सरोजनीनगर में कैश वैन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर लूटहो ? चिनहट में प्रॉपर्टी डीलर विशाल यादव उर्फ बुंदी को गोलियों से भूनने वाले विमल, कमल और समर सिह नामजद होने के बावजूद पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हजरतगंज में बुजुर्ग महिला की हत्या का मामला, मड़ियांव में पीजीआई डाक्टर के घर पड़ी डकैती की घटनाएं ठंडे बस्ते में है।

चोरी और डकैती का भी  खुलासा नहीं
हत्यओं के मामले का खुलासा तो दूर की बात पुलिस चोरी और डकैती की भी  घटनाओं का खुलासा करने में पीछे है। चिनहट में रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर के घर पर धावा बोलकर एक करोड़ का माल लूटने वाले डकैतों और गाजीपुर के सर्वोदयनगर में फरजाना, विभूतिखंड के वि•ावखंड निवासी टाटा मोटर्स के अफसर हिमांशु गिहोत्रा तथा बहुखंडी मंत्री आवास में रहने वाले सपा नेता रिजवान बरकाती का सामान चोरी करने वालों का •ाी कुछ पता नहीं चल सका है।

हाइटेक पुलिसिंग भी  फेल
राजधानी में कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए हाई टेक पुलिस का गठन हुआ था साथ ही पुलिस को और आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाये गये थे। जिसमें  हाईटेक गाड़ियां दी गयीं, हाईटेक कंट्रोल रूम बना और 70 चौराहों पर कैमरे लगाये गये। मगर इतने ताम झाम के बाद •ाी शहर में अपराध रुकने का नाम नहीं ले रहे है।
घटनाएं जो पुलिस के लिए बनी सिर दर्द

17 जून : मानकनगर की कनौसी रेलवे कॉलोनी में आॅटो चालक रिकू यादव की कुल्हाड़ी मारकर हत्या।
18 जून : चिनहट के कंचनपुर मटियारी में बर्थडे पार्टी में प्रॉपर्टी डीलर विशाल यादव उर्फ बुंदी को गोलियों से •ाूना। कृष्णानगर के अलीनगर सुनहरा निवासी प्रॉपर्टी डीलर राजबहादुर सिह की रुस्तमपुर में गोली मारकर हत्या।
19 जून : बाजारखाला के •ावानीगंज में स्कूल वैन संचालक आफाक के इकलौते बेटे बिलाल की हत्या।
21 जून : पीजीआई के रानीखेड़ा गांव निवासी अयोध्या प्रसाद को बेटे ने चाकू से गोदकर मार डाला। मड़ियांव के केशवनगर में इंजीनियर शैलेश तिवारी उर्फ टिकू की कार में हत्या।
22 जून : सरोजनीनगर के न्यू गुढ़ौरा में शहीद पथ की सर्विस लेन पर कैश वैन पर ताबड़तोड़ फायरिग कर कस्टोडियन की हत्या कर लाखों लूटे। आलमबाग में जमीन कब्जाने को लेकर खुलेआम फायरिग।
25 जून : अलीगंज में केंद्रीय विद्यालय के पीछे बोरे में मिला युवती का शव।
26 जून : निशातगंज में मोबाइल चोरी के आरोप में किशोर की हत्या। मोहनलालगंज के जंगलों में हत्या कर फेंका युवक का शव।
27 जून : पीजीआई में जंगल में युवती की हत्या। चिनहट में रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर को बंधक बनाकर एक करोड़ की डकैती।
पीजीआई में जंगल में मिली युवती की लाश।
-नौकरी के नाम पर चिनहट में छात्रा के साथ गैंगरेप, विडियो बनाया।
गोमतीनगर के विपुलखंड में रहने वाले रिटायर्ड बैंक कर्मी राकेश नारायण मिश्रा व उनकी पत्नी की गत 14 अप्रैल 2014 को हत्या कर दी गई।
मड़ियांव इलाके में गत एक जून को सैक्स रैकेट संचालिका सायरा बानो और उसकी नाबालिग बेटी की गोली मारकर हत्या की गई।
28 फरवरी : हसनगंज के डालीगंज में दिनदहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने एटीएम कैश वैन के गार्ड, चालक व लोडर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करते हुए 5० लाख रुपए लूट कर फरार हो गए थे।
गोमतीनगर के विशालखंड में वर्ष 2013 में हुए एक गैंगवार में दो शातिर अपराधियों को गोलियों से •ाून दिया गया था।
गाजीपुर के रविंद्ग पल्ली में रहने वाली देवरानी सरला श्रीवास्तव और जेठानी देवचंद्र की निर्मम हत्या की गई।
चौक में वर्ष 2013 में क्राकरी कारोबारी व उसके नौकर की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
पांडेयगंज में वर्ष 2012 को नानी व उसकी पोती की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में घटना का खुलासा किया था।

#बढता अपराध #बेबस पुलिस #क्राइम #राजधानी 

महिलाओं के लिए असुरक्षित राजधानी

इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। प्रदेश में सबसे ज्यादा सुरक्षित कही जानी वाली राजधानी बभी  अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नजर नहीं आ रही है। जिस प्रदेश की राजधानी में ही महिला सुरक्षित न हो उसके अन्य जिलों में महिलाओं की सुरक्षा की अंदाजा असानी से लगाया जा सकता है। आये दिन हो रही घटनाओं ने महिलाओं को घर में दुबक कर रहने को मजबूर दिया है। छेड़ छाड़, बलात्कार, छीटाकाशी, सरे राह लडकी को अगवाकर लेने की घटनाएं  रोज सुबह अखबार की सुर्खियां बन जाती है। महिला संबधी अपराध को रोकने के लिए कई योजनाओं की शुरु की है मगर सब बे असर साबित हुई है। गौरी हत्याकांड ने तो शहर की कानून व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया उससे पहले मोहनलालगंज में महिला की बलात्कार कर के नृशंस हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं के बाद •ाी राजधानी में महिलाएं कितनी सुरक्षित है इसकी बानगी हाल में हुई संगीन वारदातें स्वयं ही बयान करती है। हजरतगंज में बुजुर्ग महिला की दिनदहाड़े घर में घुसकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा विवाहिता को दहेज के लिए सूली पर चढ़ा दिया गया। यह सब घटनाएं बढ़ रहे महिला सम्बन्धी क्राइम ग्राफ की और इशारा कर रही है।

कठोर कार्रवाई ना होने से बढ़ी घटनाएं
मोहनलालगंज हो या गौरी हत्याकांड सभी  केसों में पुलिस की लापरवाही सामने आई है महिलाओं  के प्रति जितनी सरकार ओर पुलिस गं•ाीर नजर आने का ड्रामा  करती है हकीकत में उतनी है नहीं। हाल में महिलाओं के प्रति हिंसा के मामलों में तेजी से बढोत्तरी हुई है। घर से लेकर सड़क तक कहीं भी  महिला सुरक्षित नहीं नजर आती है इसके बावजूद पुलिस महकमा की उदासीनता उनको और निराश करती है। शोहदों द्वारा सरे राह लडकियों को छेड़ा जाता है ऐसे लोगों पर श्किंजा कसने के लिए पुलिस ने अ•िायान भी  चलाया मगर वो भी  कुछ दिनों बाद ही फुस्स हो गया।




धरी रह गई योजनाएं
सरकार ने महिलाओं पर हो रहे अपराध को रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1090 की शुरुवात की जिसका अशार भी  हुआ मगर कुछ ही महीनों में ये सेवा भी  अपराध को र७ोकने में नाकाम साबित हो रही है कई बार तो महिलाओं और लडकियों की शिकायत रहती है कि नंबर मिलता ही नहीं है ऐसे में यदि कोई  मुसीबत में हो तो हेल्प कैसे मिलेगी। इसके अलावा यहां घरेलू हिंसा निरोधक कानून बनने के 10 साल के बाद ही मामलों को निस्तारण के लिए जिला संरक्षा अधिकारियों की पूर्णकालिक नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए जवाब तलब किया है।

घर के अंदर भी  नहीं सुरक्षित महिलाएं
शहर के अंदर महिला सुरक्षा कितनी चुस्त दुरुस्त है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वो अपने घर के अंदर ही अब सुरक्षित नहीं रह गई है। हजरतगंज में दिन दहाडें एक बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी है। जिसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है इसके अलावा घर में घुसकर दंबगो द्वारा मड़ियाव क्षेत्र में लङ्मकी के साथ दुराचार करने की भी  घटना सामने आई है हलाकि अ•ाी इसकी पुष्टि नहीं हुई है ।


घटनाएं जिनमें नहीं हुई कार्रवाई
27 जून- पीजीआई इलाके के सु•ाानी खेड़ा स्थित जंगल में युवती का शव अर्द्धनग्न अवस्था में औंधे मुंह पड़ा मिला था। घटना स्थल से शराब, बियर, मिनरल वाटर की बोतले और बिरयानी के दोने मिले हैं। साथ ही आपत्तिजनक वस्तुएं भी  बरामद हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार महिला के साथ कोई दुराचार नहीं हुआ था। उसकी गला दबाकर हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुराचार की पुष्टि न होने के बाद पुलिस हत्यारों की तलाश में जुटी है। सूत्रों के अनुसार पुलिस हत्यारों के करीब पहुँच चुकी है। महिला की शिनाख्त हो चुकी है। बिहार निवासी महिला के परिजनों से पुलिस पूछताछ में जुटी है।

 30 जून- चिनहट कोतवाली क्षेत्र में एक छात्रा के साथ गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया था। पीड़ित छात्रा के मुताबिक बीते 15 जून को तारा का पुरवा गांव निवासी कौशल यादव व लवकुश मौर्या उर्फ बाबा ने एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी दिलाने के बहाने उसे अपनी लग्जरी गाड़ी में बैठाकर इमलीबांध बाबा मंदिर के जंगल में लेकर गये। वहां उसके साथ गैंगरेप कर वीडियो क्लिप बना ली। छात्रा के विरोध करने पर आरोपियों ने वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी थी। और किसी को बताने पर पूरे परिवार को जान से मारने की दी। बदनामी के डर से छात्रा ने यह बात किसी को नही बताई। 27 जून की शाम आरोपी लवकुश व कौशल छात्रा के घर पहुॅचे और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर छोटी बहन को रात में जंगल में लाने की बात कहकर चले गये। छात्रा जब रात को आरोपियों द्बारा बुलाये गये पते पर नही पहुॅची तो आरोपियों ने गैंगरेप की वीडियो क्लिप पूरे गांव में बांट दिया। वीडियो क्लिप सार्वजनिक होते ही छात्रा के सब्र का बांध टूट गया और उसने अपने साथ हुयी दरिदगी की बात परिजनों को बताई। छात्रा के परिजनों ने आरोपियों के कुकर्मो की शिकायत महिला थाने में की है।
 6 जुलाई- राजधानी के हजरतगंज इलाके में दिनदहाड़े बुजुर्ग महिला रामरती की गला घोट कर हत्या कर दी गई। नवल किशोर रोड निवासी 89 वर्षीय रामरति देवी तीसरी मंजिल पर बने घर में दो बेटे, उनके परिवार व एक स्व. बेटे के परिवार के साथ रहती थी। रामरती की बहु शारदा ने बताया था कि दोपहर करीब 2:30 के वक्त उसने रामरती को खाना दिया। इसके बाद शारदा अपने कमरे में टीवी देखने लगी। परिजनों ने बताया की रामरती खाना खाने के बाद हमेशा सोने के लिए अपने कमरे में चली जाती थी। करीब तीन बजे दूसरी बहु सरला •ाी उनके कमरे से चली आई।जब परिवार वालों ने  देखा तो महिला के मुंह पर तकिया रखी हुई थी और उनके सिर पर किसी •ाारी वास्तु से वार किया गया था। पूरा बिस्तर खून से सना था। जिसका खुलासा आज तक नहीं हो पाया।

22 जुलाई- राजधानी के मानकनगर इलाके में रहने वाली एक विवाहिता को दहेज के लिए सूली पर चढ़ा दिया गया। प्राइवेट कम्पनी कर्मचारी विनोद शर्मा पत्नी 35 वर्षीय संतोष कुमारी व दो बच्चों के साथ रामप्रसाद खेड़ा में रहता था। संतोष की मां तेजकुमारी ने आरोप लगाया था कि बीते 18 जुलाई को विनोद पत्नी संतोष को अधमरी अवस्था में मायके छोड़कर चला गया। परिवार वालों ने संतोष को इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल में •ार्ती कराया, जहां 22 की देर रात उसकी मौत हो गयी थी। पुलिस ने इस मामले में संतोष के पति विनोद के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर ली है। लेकिन गिरफ़्तारी के नाम पर आज तक कुछ नहीं हुआ।


25 जुलाई- आशियाना थानाक्षेत्र के खजाना मार्केट के पास बने नाले में शनिवार सुबह महिला का अर्धनग्न शव पड़ा देखा गया। जिसकी सूचना राहगीरों ने पुलिस को दी। सूचना पाकर मौके पर आशियाना पुलिस पहुंची और शव को आनन-फानन में बाहर निकलवाया। पहचान कराने के लिए आस-पास के लोगो से पहचान कराने की कोशिश की लेकिन महिला की पहचान नही हो सकी। आशंका जताई जा रही है महिला की बलात्कार के बाद हत्या कर शव पहचान छिपाने के नियत से नाले में ड्डफेका गया है। महिला की शिनाख्त नहीं हो सकी है। राजधानी के अन्य थानो और आस पास के जिलों में •ाी महिला की गुमशुदगी दर्ज होने की जानकारी जुटाई जा रही है।

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