Saturday, 23 November 2019

मैं वक्त हूं मेरे कदम से कदम मिलाकर चलिए


किसी की बाज़ी कैसी घात
वक़्त का पाँसा वक़्त की बात 

शौकत परदेसी का शेर  मेरे स्वभाव और चरित्र को बयां करता है। महाराष्ट्र की राजनीति में मेरा सबसे अहम किरदार रहा है मैं हमेशा से ही मौके की नजाकत के साथ रहा हूं। कभी कांग्रेस के साथ मेरा बहुत अच्छा गठबंधन रहा। आजादी के बाद से लंबे समय तक मैं कांग्रेस के साथ रहा। इसलिए नहीं कि मैं रहना चाहता था बल्कि इसलिए क्योकि कांग्रेस ने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर चाल चली। फिर उसे खुदा होने का एहसास होने लगा और वो मुझे अपने इशारे पर चलाने की कोशिश की । लेकिन
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उसको एहसास नहीं था कि मैं रूकने वालों में नहीं न ही किसी के इशारे पर चलना वाला। मैं तो एक सधी हुई चाल और बंधे हुए कदमों पर ही चलता हूं। इसलिए कांग्रेस रूक गई और मैं आगे निकल गया और मेरे कदमों की ताल से भाजपा ने अपने कदम मिला लिए। 2014 से लेकर अब तक भाजपा ने मेरा हर मौके पर, हर मोड़ पर, हर जगह पर सही इस्तेमाल किया। इसका मतलब यह नहीं कि मैं उसके साथ हूं बस मेरा इस्तेमाल भाजपा ने सबसे सही तरीके से किया। आप जानना चाहते है कि मैं कौन हूं तो बताता हू मैं वक्त हूं, 

मेरा कब, कहां और कैसे इस्तेमाल किया जाए यह आप पर निर्भर करता है। कई लोग कहते है कि मैं उनके साथ हूं। लेकिन ऐसा नहीं है मैं तो हर एक के साथ हूं आप के साथ हूं, सामने वाले के साथ हूं, आपके दुश्मन के भी साथ हूं और आपके मित्र के साथ भी हूं। मैं उसके साथ भी हूं जो नहीं मानता कि मैं उसके साथ हूं। खैर जब लोग कुछ हासिल नहीं कर पाते है, तो मेरी बुराई ही करते रहते है। मुझे इसकी आदत हो गई है। जब वह हासिल करने से चूक जाते है तो अपने को गंगा जल जैसा पवित्र बताकर मां गंगा में गिरने वाले सीवेज की गंदगी की तरह  सीधा इल्जाम मेरे ऊपर लगा देते है कि मेरा वक्त सही नहीं था। अगर वक्त सही न होता तो आप वो सोच ही नहीं पाते जो आप सोच रहे है। मैं फिर आप से कहूंगा कि मेरे यानि वक्त के साथ चलने में ही भलाई है मैं इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मैं बहुत ही बलवान हूं, घमंडी हूं, निर्दयी हूं बल्कि इसलिए कह रह रहा हूं कि ताकि आप आगे बढ सके। आप अपने कदमों खुद रोक देते हैं और कहते है कि मेरा वक्त न साथ नहीं दिया तो मुझे बहुत तकलीफ होती है। असल में मैं आपके लक्ष्य खाेने का कारण नहीं होता हूं बल्कि आप खुद होते है  क्योकि आप अपने निर्णय लेने की क्षमता खो देते है, इतने इल्जाम लगने के बाद भी मैं बार बार आपको मौका देता रहता हूं। आगे निकल जाने के बाद भी मैं आपको आवाज देता हूं कि अभी भी मेरे साथ आ सकते हो बस चलने की जगह थोड़ी सी दौड़ लगानी पड़ेगी जब आप दौड़ के मेरे पास आ जाएंगे तो यकीन मानिए मैं आपके साथ फिर से कदम से कदम मिला कर चलने लगूंगा। लेकिन आप तो उठते ही नहीं है किस्मत और मेरे सहारे बैठे रहते है। मैं तो घड़ी की सुई के हिसाब से चलता हूं जब आप मेरे सहारे बैठे रहते है तब मैं सेकेंड दर सेकेंड आपके लक्ष्य से आपको दूर लेके जाता हूं लेकेिन मैं आपका दुश्मन नहीं हूं आप रूक सकते है मैं नहीं । मेरा तो चलते रहना ही नियति है। अगर मैं रूक गया तो यह ब्रह्मांड रूक और मैं इतना स्वार्थी नहीं हूं कि सिर्फ आप के लक्ष्य की पूर्ति के लिए मैं पूरे ब्रहमांड को ही खतरे में डाल दूं इसलिए मैं न चाहते हुए भी चलता रहता हूं। भले ही गलत व्यक्ति ही मेरा फायदा क्यों न उठा ले। हमारे साथ चलना ही होगा क्योकि अगर आप मेरे साथ नहीं चलेेगें तो हमारे आप के कदमताल नहीं मिल पाएंगे जिससे न एक जैसी धुन निकलेगी और ना ही एक जैसी चाल होगी। या तो आप पीछे रह जाएंगे या हम। इस कारण कई गलत लोग जो मेरा इस्तेमाल करना सीख जाते है मैं न चाहते हुए भी उनके साथ चलने लगता हूं। 
आखिर में आपके लिए शहरयार जी का यह शेर पेश कर रहा हूं 
वक़्त को क्यूँ भला बुरा कहिए
तुझ को होना ही था जुदा हम से।।

#maharashtrapolitics #shivseena #ncp #congress #politics #waqt #samay 

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mohammad.fazil
9918811757
fazil1688@gmail.com

Monday, 18 November 2019

दोस्ती ही प्यार है !

सुनो ना़.....अरे सुनो तो तुम मेरी कोई बात ही नहीं सुनते हो.....अभी तुम्हारी गर्लफ्रेंड कहती तो सारे काम छोड़ देते। वह फोन पर मुझे बोले जा रही थी मैं उसको समझा रहा था कि ऐसा नहीं है तुम मेरी दोस्त हो तुम्हारी जगह अलग है और मेरी गर्लफ्रेंड
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की जगह अलग। तुम दोनों ही मेरे लिए इम्पॉटैंट हो। तभी वो गुस्से में बोली...अच्छा तेरह साल हो गए हमारी दोस्ती को आज तक मैं ही तुम्हारे लिए सबसे ज्यादा इम्पॉटैंट थी अब छह महीने पहले बनी तुम्हारी गर्लफ्रेंड भी मेरे इतनी ही इम्
पॉटैंट हो गई वाह..... एक दो महीने बाद तो तुम मुझे भूल ही जाओगे मैंने उसकी बात काटते हुए कहा कि अरे पागल हो क्या ऐसा कैसे हो सकता है। तुम बात को अलग वे में लेकर जा रही हो। अच्छा सुनो अब कल बात करता हूं यार सुबह ऑफिस जल्दी जाना है। मेरी बात सुनकर वह बोली़..... हम्मम अब तो तुमको नींद आएगी ही ऐसे तो पूरी पूरी रात मुझसे बात किया करते थे साफ बोलो न कि गर्लफ्रेंड से बात करनी है। मैं खुद ही फोन रख देती अब जाओ तुम बात करो गुड नाइट। इससे पहले मैं कुछ कह पाता उसने फोन ही डिस कनेक्ट कर दिया। मैं सोच रहा था कि आखिर ऐसा क्या हो गया पहले तो यह सही से बात करती थी। कुछ मिनट बात उसकी एक मिस्ड कॉल आ गई मैंने पलट कर फोन किया। फोन उठाते ही वह बोली, तुमको तो नींद आ रही थी। मुझे फोन डिस कनेक्ट करे करीब दस मिनट हो गए और तुम अभी तक जग रहे हो। मैं गुस्से में उसके ऊपर चिल्लाया दिमाग खराब है तुम्हारा । आज हुआ क्या है तुम्हें कुछ भी बोले जा रही हो बात करनी है तो करो वरना फोन रखो बेवजह मेरा दिमाग मत खराब करो। कुछ देर तक दोनों तरफ सन्नाटा छा गया फिर मैंने बोला अच्छा बताओ तुम क्या कह रही थी कौन सी बात बतानी थी बताओ सुन रहा हूं मेरी बात खत्म होते ही वो बोल पड़ी कि सुनो तुम अपनी गर्लफ्रेंड से रिलेशन खत्म कर दो क्योंकि वो लड़की तुम्हारे लिए सही नहीं है। मैं उसकी बात सुनकर चौक गया अरे तुम्हारी ही तो दोस्त है तुमने ही तो हमें मिलवाया था आज कह रही हो रिलेशन खत्म कर दो हुआ क्या। वह बोली... बस मैं कह रही हूं न कि तुम खत्म कर दो आज के बाद उससे बात मत करना अगर तुम मना नहीं कर पा रहे हो तो मैं ही उसको बोल देती हूं और हां मैं मजाक नहीं कर रही हूं अगर उससे बात करना है तो मुझसे मत करना। अब यह तो उससे ही बात कर लो या मुझसे। एक मिनट के लिए तो मैं एकदम चुप हो गया। उसने मुझसे वो करने को कहा जो मैं कभी नहीं कर सकता। वह जानती थी कि मैं उससे चाहे जितना लडूं झगड़ा करू मगर उसको कभी छोड़ नही सकता। मेरी इसी कमजोरी का वो हर बार फायदा उठाती थी और मुझसे हर काम यही कह कर करवा लेती थी कि या तो वो या तो मैं। आज भी वही जीत गई।

#dostipyarhai #friendship #friendlove #phonecall

किस्मत कनेक्शन ऐसा कि किस्मतपर हो गया यकीन

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कैब आ गई है आराम से जाना, हॉस्टल पहुंचकर मुझे फोन करना और अपना ख्याल रखना। ठीक है मां कहते हुए मैं जल्दी से नीचे आ गया। शेयरिंग कैब होने के की वजह से उसमें पहले कोई बैठा था जिसको देखकर एक मिनट के लिए मैं रूक सा गया। कैब में एक खूबसूरत सी लड़की बैठी थी। उसकी आंखें समंदर सी गहरी थी। खुले बाल काले बादलों की तरह घने हुए थे, उसके माथे पर लगी बिंदी जैसे किसी ने चांद में काला टिका लगा दिया हो। मैं उसको देखे ही जा रहा था एक बार तो लगा शायद गलत कैब की तरफ आ गया हूँ। तभी कैब ड्राइवर ने आवाज देते हुए कहा कि भइया आप आगे बैठ जाएं। उसकी आवाज सुन कर मेरा ध्यान उसकी तरफ गया। आगे का गेट खोलते हुए मैं बैठ गया लेकिन बार बार उसको देखने का दिल कर रहा था अब मुड़ मुड़ के देखना भी अच्छा नही लग रहा था इसलिए मैं गाड़ी में लगे शीशे में उसको निहारने लगा। कैब रेलवे स्टेशन की ओर चल दी। मेरे घर से रेलवे स्टेशन की ओर जो रोड जाती है ना भाई साहब क्या बताऊँ इतने गड्ढे इतने गड्ढे है कि अच्छे खासे इंसान की हालत खराब हो जाए। लेकिन उस दिन मुझे एक भी झटका महसूस न हुआ। कैब वाला आपNई धुन में चलाए जा रहा था और मैं अपनी धुन में उसको निहारे जा रहा था। झटके से कभी वो इधर हिलती तो कभी उधर कभी बालो को सही करती तो कभी अपने बैग को संभालती। ऐसे ही हम रेलवे सटेशन के पास पहुच गए। रेलवे स्टेशन के पास बहुत जाम लगा था तो ड्राइवर बोला, कि ट्रॉफिक बहुत है रास्ता खुलने में एक घंटा लग सकता है, स्टेशन सौ मीटर ही रह गया है आप लोग चाहे तो यहीं उतर जाए। मैं तो तुरंत उतर गया क्योकि ट्रैन का समय हो रहा था। लेकिन वो बोली कि मेरे पास दो बैग है एक बहुत भारी है मैं कैसे ले जाऊंगी। मैंने उससे कहा कि अगर प्रॉब्लम न हो तो मैं आपकी हेल्प कर सकता हूं मुझे भी स्टेशन ही जाना है। एक मिनट के लिए तो वह चुप हो गई फिर बोली ओके.... मैंने उसका बैग पीठ पर लादा और अपना बैग हाथ में पकड़ कर चल दिया। आप लोग तो जानते ही होंगे हॉस्टल में रहने वाले लड़को का बैग कितना भारी होता है बस एक जीन्स और 2 टीशर्ट में पूरा महीना निकाल देते है। बीस इतना ही सामान मेरे पास भी था। लेकिन उसका बैग बहुत भारी था मगर मैंने चेहरे पर शिकन नही आने दी आखिर डूड वाला लुक भी तो देना था। कुछ देर में स्टेशन पहुंच गए मैने उसको बैग दिया तो उसने मुझे बस मुस्कुराते हुए थैक्यू बोला। घर से स्टेशन तक के करीब एक घंटे के सफर के दौरान मेरी उससे बस इतनी ही बात हुई। मैं स्टेशन पर पहुंचकर वहां बने वेटिंग रूम में ट्रैन का इंतजार करने लगा। मेरे दिल और दिमाग में उसका ही चेहरा घूम रहा था, तभी मेरे पीछे से एक आवाज आई एक्सक्यूज मी, मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कैब वाली लड़की मेरे सामने खड़ी थी, इससे पहले। मैं कुछ समझ पाता उसने कहा क्या मैं यहां बैठ सकती हूँ। मैंने सिर हिलाकर उसको बैठने को कहा। कुछ देर चुपचाप बैठने के बाद मैंने हिम्मत करके उससे पूछा आप कहां जा रही हो तो वह बोली, जयपुर मैं वहां स्टडी करती हूं। मैंने कहा अच्छा मैं भी जयपुर में ही स्टडी कर रहा हूं। इसके बाद हम लोगों की बातचीत शुरु हुई। अभी दस मिनट ही हुए थे कि हमेशा घंटो लेट आनी वाली ट्रेन अपने सही समय पर आ गई। मैंने कहा चलो ट्रैन आ गई है।आप की सीट किस कोच में है ? उसने बोला एस फोर । इत्तेफाक देखें कि ट्रैन में हम दोनों की सीट भी एस फोर कोच में आमने सामने ही थी। तब मुझे एहसास हुआ कि कि कुछ तो किस्मत कनेक्शन है जो हम बार बार मिल रहे है। लखनऊ टू जयपुर सफर के दौरान हम दोनों के बीच काफी बातें हुई जब हम जयपुर पहुंचे तो वह स्टेशन के बाहर आकर ऑटो बुक करने लगी और मैं रूक कर उसको देखने लगे तभी वह पीछे मुड़कर बोली, आप के साथ सफर अच्छा रहा,वक़्त का पता ही नही चला। मैंने कहा हां लेकिन वक़्त बहुत जल्दी गुजर गया। वो बोली अच्छा वक्त ऐसे ही गुजर जाता है। मैंने कहा दुबारा यह अच्छा वक्त कब आएगा। वह बोली ऐसे ही किस्मत में लिखा होगा तो हो जाएगा। मैंने कहा कि, किस्मत लखनऊ से यहां तक एक साथ ले आई। अब किस्मत पर और कितना यकीन करें। वह हंसने लगी और बोली तो अब क्या करें, मैंने कहा कि अब हमें अपना नंबर एक्सचेंज कर लेना चाहिए ताकि आगे किस्मत के मिलाने का इंतजार न करना पड़े..... इस बात को करीब पांच साल से ज्यादा हो गए। अब हमें मिलने के लिए किस्मत का इंतजार नही करना पड़ता। एक बात तो बताना ही भूल गया उस दिन से मैं किस्मत में यकीन करने लगा हूँ।

#kismat #lovestory #railwaystation #train 
#किस्मत #रेलवेस्टेशन #ट्रैन 

नोट बंदी ने दिला दिया बराबरी का हक

3 साल पहले मेरी ज़िंदगी मे खुशी का एक पल भी नही था। कोई भी ऐसा नही था जिससे मैं अपने दिल की बात कह सकूं। दोस्त यार मेरा मजाक उड़ाते थे। यहां तक अगर मैं अकेले कही जाता था तो लोग मुझे देख कर सकते थे। मॉल, पार्क तो मैंने जाना ही बंद कर दिया। यहां तक घरेलू फंक्शन में भी जाने से बचता था। मैं खुद को बहुत अकेला महसूस करने लगा था मेरा जीवन कोरे कागज से भी ज्यादा सफेद था। उदासी भरी जिंदगी जीने को मजबूर था। फिर #8novembre को रात 8 बजे से मेरी जिंदगी ही बदल गई। वीरान पड़े मेरे दिल में खुशियों के फूल खिल गए। ज़िन्दगी का हर पन्ना ब्लैक एंड वाइट से कलर फुल हो गया था। क्योकि मेरी लाइफ में पहली बार कोई #बन्दी आई थी जिसका नाम #नोटबंदी था। उसके आते ही मेरी ज़िंदगी बदल गई कैसे आपको बताते है-
1- जो पहले ज्यादा खुश थे उनकी खुशी कम हो कर मेरे बराबर आ गई ।
2-जो पहले मुझे देख कर हंसते थे वो सब लोग लोगों के चेहरे की रंगत बदल गई। अब वो खुद पर हँसने लायक नही रहे।
3- जो मेरी बेरोजगारी का मजाक उड़ाते थे अब वो खुद बेरोजगार हो गए।
4- जो मुझे चिढ़ाने के लिए अपनी गर्ल फ्रेंड के गले मे हाथ डाल कर उनको शॉपिंग करवाने ले जाते थे। आज वो उनको आइसक्रीम भी नही खिला पा रहे है।
5- मेरे सांवलेपन का मजाक बनाने वाले बैंक और एटीएम की लाइन में लग कर खुद सांवले ही नही काले हो गए है।
6- जो कभी मेरे साथ चाय की टापरी पर चाय नही पीते थे आज वो मुझे फोन करके खुद बुलाते है (क्योकि चाय के 15 रुपये मैं ही देता हूँ)
7- जो कभी मेरे साथ बैठना गवारा नही करते थे आज 24 घंटे में 18 घंटे मेरे साथ ही रहते है (क्योकि उन सबकी नोटबन्दी में नौकरी चली गई)
मेरी जिंदगी के भले ही चढ़ाव न आया हो लेकिन मोदी जी ने #नोटबन्दी कर के बाकी सबकी जिंदगी में उतार जरूर ला दिया। इसलिए वो सब मेरे बराबर आ गए। यह सब #मोदी जी की वजह से हो पाया। #सबक_साथ_सबका_विकास थैंक यू मोदी जी।

बस स्टॉप से शुरु हुआ मेरा प्रेम सफर


घर से पहली बार मैं बाहर पढ़ाई के सिलसिले में निकला था। रोज सुबह आठ बजे उठना और नौ बजे की बस पकड़कर कॉलेज जाना। शाम को कॉलेज से छूटते ही फिर से बस पकड़कर घर आ जाना। करीब साल भर से यहीं मेरी जिंदगी थी। बस स्टॉप, कॉलेज, घर, पढ़ाई और सोना। यह चार चीजों के अलावा मेरी जिंदगी में कुछ न था। ऐसी जिंदगी वो भी बाहर घर से बाहर रहते हुए लोगों को हैरान करने वाली है।लेकिन मेरी ज़िंदगी के पल ऐसे ही गुजर रहे थे। दोस्त यार तो थे लेकिन बहुत ही कम, नया शहर नए लोग नया माहौल में मैं खुद को ढालने की कोशिश कर रहा था। रोज की ज़िंदगी की तरह उस दिन भी मैं बस स्टॉप पर बस का इंतजार कर रहा था लेकिन मुझे क्या पता था कि यह बस स्टॉप पर ही मेरी जिंदगी प्यार, खुशी के इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर होगी। कान में इयर फोन लगाए मैं मोबाइल में गाने सुन रहा था। तभी मुझे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ। मैंने पलटकर देखा तो बहुत ही खूबसूरत सी सफेद ड्रेस और गुस्से से लाल लड़की मुझसे कुछ कह रही थी मैंने फौरन अपने इयरफोन निकाले और बोला जी बताएं। उसने कहा.... बताएं वताएं नहीं आप के पैर के नीचे मेरा टुपट्टा दबा हुआ हुआ। मैं अपना पैर हटाते हुए बोला सॉरी पता नहीं चला। वह बोली पता कैसे चलता कान में तो
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इयरफोन लगाए रखे हुए हो। वह गुस्से में मुझे बातें सुनाती जा रही थी। आस पास खड़े लोग मुझे देख रहे थे। किसी के लिए भी पब्लिक प्लेस में यह मोमेंट बहुत ही ऑकवर्ड होता है लेकिन मुझे इसका फर्क ही नही पड़ा।मैं उसको देखे जा रहा था। इतने मैं बस आ गई और वह बस में बैठ गई। मैं भी उस बस में सवार हो गया। रास्ते भर उसको देखता रहा। कॉलेज पहुंचने के बाद भी पूरे दिन मेरे दिमाग में उसकी ही सूरत घूमती रही। रात भर मैं उसके खयालों में खोया रहा। आंखों से नींद गायब थी बस इंतजार था सुबह का। पहली बार मैं किसी को देखने को बेताब था। बार बार नजरें घड़ी की तरफ जाती। दिल में एक अजीब से बैचेनी थी। किसी तरह सुबह हो ताकि मैं उससे मिल सकूं। उस दिन मैं जल्दी ही उठ गया और जल्दी ही बस स्टॉप पहुंचकर उसका इंतजार करने लगा। एक एक मिनट घंटों के बराबर लग रहा था। चारों तरफ नजरें उसको ही तलाश कर रही थी लेकिन वो नज़र ही नही आ रही थी जैसे जैसे बस का समय होता जा रहा था मेरी बेताबी बढ़ती जा रही थी तभी एकाएक वह नजर आई। उस दिन वह ब्लैक ड्रेस में थी, उसके खुले हुए बाल मुझे आसमान में छाए काले बादलों की तरह नजर आ रहे थे। उसके गले का लॉकेट ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी ने चांद को कैद कर लिया हो। मेरे तरफ आते उसके कदमों की आहट मेरे दिल की धड़कनों का बढ़ा रहा थी, तभी उसकी नजरें जैसे ही मुझसे मिली मैंने मुस्कुराते हुए उसको हॉय किया। लेकिन उसने बिना जवाब दिए मुंह मोड़ लिया। उसका जवाब न देना मुझे जरा भी बुरा न लगा। बस उसको देख कर ही दिल को सुकून आ गया था। मैं रोज़ उसका बस स्टॉप पहुँच कर उसका इंतजार करता और जब वो आती तो मैं उसको कभी इशारों में कभी मुस्कुरा कर हॉय बोलता लेकिन वो जवाब नही देती। करीब पंद्रह दिन तक ऐसे ही सिलसिला चलता रहा। वह मुझे देखती और मैं उसको हाथ उठाकर हॉय बोलता। फिर एक दिन मैने उसको हॉय बोला तो उसने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया।मेरे लिए जिंदगी का वह पल सबसे खास था। फिर कई दिनों तक बस इशारों इशारों में ही बात होती रही। एक दिन किस्मत ने भी साथ दिया बस काफी भरी हुई थी। बाकी लोग बस में चढ़ गए बस मैं और वो नही चढ़ पाए। बस स्टॉप पूरा खाली हो चुका था मैं हिम्मत करके उसके पास गया और पहली बार उससे बात की। वही नॉर्मल कहाँ पढ़ती हो, घर कहाँ है कौन सा कोर्स कर रही हो मैं एक के बाद एक सवाल करता जा रहा था तभी वो बोली इंटरव्यू ले रहे हो क्या मेरा। मैने भी पलट के बोल दिया चाहो तो तुम भी ले लो मेरा इंटरव्यू। मेरे कहते ही वो हँसते हुए बोली जब जरूरी समझूंगी तो इंटरव्यू भी ले लूंगी। फिर हम दोनों में बात होने लगी और बस आ गई। फिर कई महीनों तक हम दोनों बस स्टॉप पर ही मिलते रहे। करीब 6 महीने बाद हम दोनों ने अपना नम्बर एक्सचेंज किया। उसके बाद तो भाई साहब वक़्त कम पड़ जाता था लेकिन हमारी बातें खत्म ही नही होती थी। कॉलेज का लास्ट इयर था इसके बाद मुझे शहर छोड़ के वापस घर आना होगा या किसी और शहर में जॉब के लिए जाना होगा। उस आने वाले पल को मैं सोच कर ही डर जाता हूँ। जब भी उसको बताता हूँ तो वो मेरा हाथ पकड़ के कहती है कभी कभी लंबे सफर में साथ चलने के लिए थोड़े वक़्त के लिए बिछड़ना जरूरी होता है। यह बहुत छोटा वक़्त होगा यकीन मानो ....... आखिर वो वक़्त भी आ गया कॉलेज पूरा हुआ और सब अपने घर जाने लगे उसके साथ जैसे वक़्त का पता ही नही चला कब दो साल गुजर गए। रात के करीब 8 बज रहे थे 1 30 बजे की मेरी ट्रैन थी मैं उससे बात करते करते अपना सामान पैक कर रहा था तभी वो बोली मुझे तुमसे मिलना है अभी क्योकि रात में 1 30 बजे तुम चले जाओगे फिर पता नही कब मिलोगे। या मिलने आओगे भी या नही। मैंने कहा पगला गई हो क्या अभी तो 1 घंटा पहले ही तो तुम्हारे साथ था और यह तुम कैसी बातें कर रही हो। उसने कहा मुझे कुछ नही सुन्ना मुझे मिलना है बस। पंद्रह मिनट में वही मिलो जहां पहली बार मिले थे। यह कहते ही उसने फोन रख दिया । उसको छोड़ के जाने का दिल तो मेरा भी नही था। मैं पंद्रह मिनट बाद बस स्टॉप पर पहुँच गया। वो वहां पहले से खड़ी थी मुझे देखते ही उसने गले लगा लिया। कुछ देर बाद गले से हाथ निकलते हुए उसने मुझे एक गिफ्ट दिया। और बोली जब ट्रेन में बैठ जाना तब खोलना। फिर वो चली गई। जब मैं ट्रैन में बैठा तो उसका गिफ्ट खोल के देखा उसको देख कर मैं हैरान रह गया। असल में एक फोटो फ्रेम करवा कर दी थी जो हमारी पहली मुलाकात का थी याद आया नही न अरे उसी दिन की जब उसका दुपट्टा मेरे पैरों के नीचे दब गया था तस्वीर में वो मुझ पर चिल्ला रही थी और मैं उसको देख रहा था। उसके बाद मैंने उसको फोन किया। और बोला यह फ़ोटो तुम्हारे पास कैसे आई किसने क्लिक की तो उसने बस इतना ही कहा कि मेरे पास तो शुरू से एक्टिवा थी मैं कॉलेज भी उसी से जाती थी 2 साल पहले खराब हो गई थी इसलिए मुझे बस से जाना पड़ा कुछ दिन पांच दिन बाद सही भी हो गई थी और हां तुम यह मत समझना की तुम ही मुझसे मिलने बस स्टॉप र आते थे। ...... बस स्टॉप से शुरू हुई कहानी आज भी बदस्तूर जारी है।

  • #busstop #lovestory #merikalam #collegelife 
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अंधेरी रात में जला मेरे दिल का बल्ब

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रात के दो बजे मैंने अपने दोस्त की चादर खींचते हुए उससे कहा, चलो यार चाय पीने चलते हैं। दोस्त खींजते हुए बोला, मैं आज नहीं जाऊंगा। तुमको जाना हो तो जाओ और वो फिर से चादर ओढ़कर सो गया। थोड़ी देर बाद मैं अकेले ही हॉस्टल से चला गया। अक्सर दोस्तों के साथ रात में बाहर की टपरी पर बैठकी हुआ करती थी। मेरे पहुंचते ही चाय वाला भी बोला, ‘भइया आज अकेले/’ मैंने कहा कि भइया तुम बस चाय पिला दो तो बस क्योंकि तुम्हारी चाय पीये बगैर नींद नहीं आती।’ मैं बाहर बेंच पर बैठकर चाय का इंतजार करने लगा। 
तभी एक लड़की ब्लैक ड्रेस में स्कूटी खींचते हुए चली आ रही थी। वो पास आकर बोली, एक्सक्यूज मी! मेरी गाड़ी स्टार्ट नहीं हो रही है। क्या आप मेरी हेल्प कर सकते हैं/ हर किसी की नजर उसको ही देख रही थी। मैंने उससे स्कूटी ली और स्टार्ट करने की कोशिश करने लगा। मैंने कहा, ‘शायद इसका प्लग खराब है इसलिए स्टार्ट नहीं हो रही है।’ वह बोली, अब मैं क्या करूंगी/ उसकी आवाज में बैचेनी और घबराहट थी। रात की वजह से वह डर रही थी। मैंने उसको हिम्मत देते हुए कहा कि परेशान ना हो। मैं प्लग साफ करके देखता हूं। शायद काम कर जाए। मैं प्लग निकाल कर देखने लगा। तभी वो बोली बर्थ डे पार्टी में गई थी, काफी देर हो गई। दो घंटे से परेशान हूं। अब तो हॉस्टल में भी एंट्री नहीं मिलेगी। मैंने मुस्कुराकर कहा कोई नहीं। ढाई बज ही रहे हैं, थोड़ी देर में सुबह हो जाएगी। फिर चली जाना। उसने कहा, तब तक मैं यहीं खड़ी रहूं/ देखो सब लड़के कैसे देख रहे हैं। उसकी आंखों में थोड़ा गुस्सा और आवाज में बैचेनी थी। मैंने उसे ढांढस बांधते हुए कहा कि घबराओ नहीं। मेरे होते हुए तुम्हें कोई कुछ नहीं करेगा। वो बोली तो फिर तुम सुबह तक मेरे साथ यहीं रूकोगे/ मैंने हंसते हुए कहा कि अरे भाई! मुझे सुबह तक में दो-तीन चाय पीनी है। फिर सुबह का नाश्ता करके ही हॉस्टल वापस जाना है। मेरी बात सुनकर वो मुस्कुराई और वहीं बेंच पर हम दोनों बैठ गए। उसके बाद चाय का दौर चलता रहा और हमारी बातें भी चलती रहीं। सुबह हुई और इत्तेफाक से प्लग लगाते ही गाड़ी भी स्टार्ट हो गई। फिर वो चली गई। उसके बाद से हमारी मुलाकातों का सिलसिला जारी है। आज भी जब चाय की टपरी पर हम दोनों बैठते हैं तो अपना वो पहला दिन जरूर याद करते हैं।  


#lovestory #love #story #college #प्रेमकहानी  #लवस्टोरी #कॉलेजलाइफ

Tuesday, 4 August 2015

सत्ता के पावॅर और सियासत की शिकार होती महिलाए


इन्टरवल एक्सप्रेस
लखनऊ। सारा मर्डर मिस्ट्री ने एक बार फिर सफेदपोश सियासत करने वालों की नियत पर सवाल खड़ा कर दिया है। अमनमणि अपने पिता अमरमणि के नक्शे कदम पर चलते हुए दिखाई दे रहे है। सत्ता और प्यार के बीच पनापती राजनैतिक महत्वाकांक्षा ने कई लडकियों की जिंदगियां बर्बाद कर दी है तो कई की जिंदगी ही छीन ली है। पहले प्यार फिर राजनीति फिर सत्ता में कुर्सी की चाहत में न जाने कितनी मासूम लडकियों का दुखद अंत हो गया। सेक्स और सियासत का यह •ाी एक रूप है। चांद-फिजा, अमरमणि और मधुमिता, आनंद सेन और शशि, दद्दू प्रसाद और कमला,  ये सारे संबंध क•ाी •ाी जोर जबरजस्ती से नहीं बनाए गए। लेकिन जब यही संबध में अपने हक की आवाज उठाई गई तो अपने रसूख से उनकी बेरहमी से हत्या करवा दी ।

मधुमिता और अमरमणि: मधुमिता एक कवयित्री थी। अतिमहत्वकांक्षा ने अमरमणि के करीब लाया। उस समय यूपी के मंत्री अमरमणि से उनका प्यार परवान चढ़ गया। दोनों गुपचुप मिलने लगे। यह बात मंत्री की पत्नी को रास नहीं आई। उनकी पत्नी और अमरमणि पर मधुमिता की हत्या 2003 में कराने का आरोप है। फिलहाल, अमरमणि जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मधुमिता हत्या किए जाने वक्त गर्•ावती थी।
आनंद सेन और शशि: यूपी के फैजाबाद की रहने वाली शशि लॉ की स्टूडेंट थी। शशि आनंद सेन के काफी करीब हो गई थी। वह राजनीति में आना चाहती थी। इसलिए ं उसने आनंद सेन को चुना। शशि के पिता खुद एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे। आनंद सेन ने •ाी उसकी आंखों में बसे इस ख्बाव को देख लिया था। फिर शुरू हुआ वायदों का दौर। वायदे बढ़ते गए, जिस्मानी दूरियां मिटती गईं। 22 अक्टूबर 2007 को शशि अचानक गायब हो गई। लंबी छानबीन के बाद पता चला कि वह इस दुनिया से जा चुकी है। उसकी हत्या की जा चुकी है।
दद्दू प्रसाद और अंगद सिंह: दद्दू प्रसाद और उनके पीए अंगद सिंह पर रेप और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाने वाली महिला ने एक बेटे को जन्म दिया है। महिला का दावा है कि दद्दू प्रसाद और उनके पीए में से कोई एक उसके बच्चे का पिता है। कई महीने पहले कमला ने यह आरोप लगाकर यूपी की राजनीति में •ाूचाल ला दिया था कि दद्दू प्रसाद लंबे समय तक उसका रेप करते रहे, जिससे वह प्रेग्नेंट हो गई। चित्रकूट जिले के बरगढ़ गांव की रहने वाली कमला गरीबी से तंग आकर और नौकरी की चाहत में बसपा नेता दद्दू प्रसाद के करीब आ गई थी। नौकरी दिलाने का झांसा देकर दददू प्रसाद ने उसका यौन शोषण किया।

पुरुपोत्तम और शीलू: बांदा के बसपा विधायक पुरुषोत्तम दिवेद्वी पर रेप का आरोप लगा जिसमें उनको कोर्ट ने सजा •ाी सुना दी है। गौरतलब है कि पीड़ित लड़की ने पूर्व विधायक और उनके साथियों पर दिसंबर 2010 में बंधक बनाकर बलात्कार करने का आरोप लगाया था। ये आरोप लगाने के बाद लड़की को पूर्व विधायक के घर में चोरी करने के आरोप में जेल •िाजवा दिया गया था। मीडिया में इसकी चर्चा जोर पकडने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने पुरुषोत्तम द्विवेदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने और इस मामले की सीबीसीआईडी से जांच के आदेश दिये थे।

धनंजय सिंह पर महिला ने लगाया था रेप का आरोप
बाहुबली सांसद धनंजय सिंह पर •ाी एक महिला ने बंदूक की नोक पर रेप करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद धनंजय सिंह पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित महिला का आरोप था कि धनंजय ने 2005 में उसके साथ बलात्कार किया और धमकी दी कि अगर इस बारे में किसी को बताया तो उसे और उसके परिवार को जान से मार दिया जाएगा।
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