Monday, 9 February 2015

सपा की मुश्किल बढ़ाने आ रहे है औवेशी

लखनऊ। महाराष्ट्र में खाता खोलने के बाद असदउद्दीन औवेसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ( एआईएमआईएम) उत्तर प्रदेश की राजनीति में कदम रखने की तैयारी कर रही है। उसके इस कदम से जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी में बैचेनी है वहीं, उसकी धुर विरोधी •ाारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी तौर पर खुशी की लहर है। एमआईएम के उत्तर प्रदेश में आने की भनक मात्र से ही यहां की राजनीति में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कट्टर विचारधारा की पार्टी होने एमआईएम के आने से आने वाले चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण की आशंका बढ़ गई है। मुस्लिम समुदाय के वोटों की गोलबंदी करना इस पार्टी का मुख्य उद्देश्य है यदि वो इसमें सफल रही तो सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
एमआईएम के फ्लोर मैनेजर और असदउद्दीन के छोटे भाई  अकबरुद्दीन औवेसी के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा भी  दर्ज हो चुका है। साम्प्रदायिक और भड्काऊ भाषणों के कारण उनकी पहचान एक कट्टर नेता के रूप हो गई है। इसी छवि के कारण एमआईएम पार्टी खास वर्ग को अपनी तरफ आकर्षित करने की तैयारी में है।
सोशल मीडिया से शुरू किया प्रचार
एमआईएम ने 2017 के यूपी विधान सभा  चुनाव के तहत बिना आये ही सोशल मीडिया के जरिये प्रचार-प्रसार शुरू कर दिया है। जिसमें खास वर्ग के लोगों को जोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। वाट्स एप, फेसबुक, ट्विटर के जरिये प्रचार-प्रसार का काम जोरों पर है।
लखनऊ की सीटों पर असर
लखनऊ जिले में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं जिसमें से मौजूदा समय में सपा के पास सात सीटें हैं। पहली बार सपा को लखनऊ इतनी ज्यादा सीटें मिली हंै। सपा का मुख्य वोट बैंक यादव यादव और मुस्लिम वर्ग है, इसी समीकरण के चलते उसको 16वीं विधानसभा में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। एमआईएम के आने से सपा के इसी समीकरण के टूटने का खतरा ज्यादा है क्योंकि मौजूदा समय लखनऊ की कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भ मिका निभाते हैं, जिसमें लखनऊ पश्चिम, लखनऊ मध्य, लखनऊ उत्तर, मलिहाबाद, बीकेटी की सीटें प्रमुख हैं। शहर की सभी  विधानसभा सीटों पर 33,18,600 मतदाता हैं, इसमें शामिल मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को काफी प्रभावित करते हैं। पुराने लखनऊ क्षेत्र में और मुस्लिम बाहुल क्षेत्रों में एमआईएम ने अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है। इसके अलावा राजधानी से लगे जिले जैसे बाराबंकी, सीतापुर मेें भी  पार्टी अपनी जमीन बनाने में जुट रही है।
बसपा और कांग्रेस से हो सकता है गठबंधन
औवेसी की पार्टी 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए बसपा या कांग्रेस से गठबंधन कर सकती है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए यही दो पार्टियां हैं जो अपने अस्तित्व को बचाने और शहर में अपनी साख बनाये रखने के लिए संघर्ष कर रही हैं। ऐसे में यदि इन दोनों पार्टियों से एमआईएम का गठबंधन होता है तो सबसे ज्यादा मुश्किल समाजवादी पार्टी को होगी।
आंध्र में मजबूत है एमआईएम
एआईएमआईएम मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश की पार्टी है। लोकसभा में एक सीट व आंध्र से अलग हुए नए राज्य तेलांगना विधानसभा में सात सीटें हैं। इस पार्टी ने महाराष्ट्र के विधान सभा चुनावों में सभा हिस्सा लिया था, जिसमें उसने दो सीटें जीती थी।

No comments:

Post a Comment